‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’, चीन से दूरी के बीच भारत के लिए अमेरिकन नेवी अफसर माइक गिल्डे का बयान

 
चीन से दूरी के बीच भारत के लिए अमेरिकन नेवी अफसर माइक गिल्डे का बयान


एक पुरानी कहावत है कि ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’। चीन के साथ बिगड़ते संबंधों के बीच अमेरिका अब भारत को कुछ ऐसी ही भूमिका में देख रहा है। अमेरिका के नेवी चीफ के दिए एक बयान से कुछ ऐसा ही साबित हो रहा है।

एक पुरानी कहावत है कि ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’। चीन के साथ बिगड़ते संबंधों के बीच अमेरिका अब भारत को कुछ ऐसी ही भूमिका में देख रहा है। अमेरिका के अमेरिकी नौसेना के ऑपरेशनल हेड एडमिरल माइक गिल्डे के दिए एक बयान से कुछ ऐसा साबित हो रहा है। अमेरिकी नेवी के सबसे बड़े अधिकारी माइक गिल्डे ने कहा कि भविष्य में चीन को काउंटर करने में भारत अमेरिका के एक बड़ा सहयोगी साबित होगा। 


गिल्डे ने यह बयान वॉशिंगट में आयोजित एक सेमिनार के दौरान दिया है। बता दें कि हाल ही में चीन और अमेरिका के संबंधों में तल्खी नए सिरे से उभरी है। पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष्य नैंसी पेलोसी और फिर अमेरिकी सांसदों का एक दल ताइवान पहुंचा था। चीन ने इसे अपनी संप्रभुता पर सवाल माना था और अमेरिका को परिणाम भुगत लेने की चेतावनी दी थी।

भारत-चीन सीमा संघर्ष की तरफ इशारा

इसकी वजह यही है कि हमारा मानना है कि भविष्य में वह हमारे लिए एक बड़ा रणनीतिक साझीदार होगा। पिछले साल अक्टूबर में भारत की पांच दिवसीय यात्रा की तरफ इशारा करते हुए गिल्डे ने कहा कि हिंद महासागर युद्धक्षेत्र हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि फैक्ट यह है कि भारत और चीन की सीमा पर हालात बहुत सामान्य नहीं हैं। यह रणनीतिक रूप से हमारे लिए काफी अहम हो सकता है।

भारत की जमकर तारीफ

अमेरिकी नेवी के सबसे बड़े अधिकारी माइक गिल्डे ने कहा कि चीन को रोकने के लिए जापान और भारत के रूप में दो अहम प्रतिरोध मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अगर चीन की नीयत ताइवान को लेकर खराब होती है तो भारत और जापान उसे रोकने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। माइक गिल्डे ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि मैंने किसी अन्य देश की तुलना में भारत की ज्यादा यात्रा की है।

ऐसी है अमेरिका की योजना

जून में क्वॉड के नेताओं-अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं ने जापान में बैठक की थी। इस दौरान पेंटागन पूर्व प्रमुख एलब्रिज कोल्बे ने निक्केई एशिया से कहा था कि वैसे तो भारत ताइवान के खिलाफ संघर्ष में सीधा योगदान नहीं दे सकता। लेकिन वह हिमालयन सीमा क्षेत्र की तरफ चीन का ध्यान खींच सकता है। उन्होंने कहा था कि अमेरिका और जापान चाहते हैं कि दक्षिण एशिया में भारत चीन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो। वह प्रभावशाली ढंग से चीन का ध्यान खींचे और एक उसके एक दूसरे बड़े युद्धक्षेत्र की समस्या उत्पन्न करे। 

   

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