टिकरा गांव में पुलिस का पहरा खेतों से की जा रही मारफीन की तस्करी ​​​​​​​

पुलिस की आंखों में धूल झोककर मारफीन की तस्कर गांव छोड़कर खेतों से मारफीन की तस्करी करते हैं जिसकी पुलिस को भनक तक नही लगी 
 
टिकरा गांव में पुलिस का पहरा खेतों से की जा रही मारफीन की तस्करी  

स्वतंत्र प्रभात

बाराबंकी मारफीन की लत में पढकर ना जाने कितने नौ युवाओ ने अपनी जिंदगी को छोड़कर मौत के गाल में समा गए और आए दिन युवा नशे की लत में फस कर बर्बाद हो रहे हैं जिस को देखते हुए प्रदेश सरकार ने नशाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए मुहिम जारी की है जिसमें तस्करों के प्रति एक अभियान चलाया जा रहा है लेकिन तस्कर भी क्या जो अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे हैं पूरा मामला जैदपुर थाना क्षेत्र के टिकरा गांव का है जहाँ टिकरा के चारों तरफ पुलिस का पहरा लगा दिया गया है उसके बावजूद भी तस्करों को कानून का जरा भी भय नहीं है और वह मारफीन बेचने का काम बंद नहीं कर रहे हैं और पुलिस की आंखों में धूल झोकने का काम कर रहे है तस्कर गांव में नाबालिग बच्चों का सहारा लेते हुए खुद खेतों में बैठकर मारफीन की सप्लाई करते हैं 18सितंबर को टिकरा गांव में घूम घूम  कर मारफीन की सप्लाई करने वाले

एक व्यक्ति को मारफीन की पुड़िया सहित गांव में ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मचारियों ने पकड़ा था लेकिन तस्करो के दबाव मे उसे मोटी रकम के बल  छोड़ दिया गया मारफीन तस्करी में विश्व विख्यात टिकरा गांव में चौबिस घंटे पुलिस मुस्तैद रहती है जहां पर दो चरणों में पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाती है जिसमें तीन इंस्पेक्टर और 14  सब इंस्पेक्टर तथा 28 पुलिस कर्मियों की ड्यूटी बदल-बदल कर 24 घंटे में लगाई जाती है जहाँ आने जाने वाले व्यक्तिओ का पता नोट करते हुए उसका मोबाइल नंबर लिया जाता है अनुमान लगाया जा सके कि टिकरा गांव के संपर्क में कितने लोग आए और गए इन पर निगरानी के लिए क्षेत्राधिकारी और पुलिस अधीक्षक बराबर संपर्क बनाए रहते हैं इसी टिकरा गांव में मरफीन बनाने के लिए क्रूड पंजाब हरियाणा राजस्थान झारखंड बिहार बंगाल आदि जनपदों से मंगा कर यहां पर मारफीन तैयार की जाती है और अन्य प्रांतों को सप्लाई की जाती है जिसको रोकने के लिए अब 24 घंटे टिकरा गांव में पुलिस मुस्तैद है लेकिन उसके बाद भी

   

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