बछरावां नगर पंचायत अध्यक्ष ने गरीब असहाय को दिया रक्तदान

बछरावां नगर पंचायत अध्यक्ष ने गरीब असहाय को दिया रक्तदान

बछरावां रायबरेली--

रक्तदान महादान को यथार्थ में चरितार्थ करते बछरावा नगर पंचायत अध्यक्ष शिवेंद्र सिंह उर्फ राम जी। गरीबों असहाय बेसहारा के बने सहारा। लोगों को आर्थिक मदद तो अभिलंब करते ही हैं और इलाज में जरूरत पड़ने पर खून तक देने में पीछे नहीं हटते हैं।

वह स्वयं अपने वाहन से जाकर जरूरतमंद को रक्तदान करते हैं। वाकिया बछरावां नगर पंचायत के वार्ड नंबर 2 किला मोहल्ला निवासी हीरा सोनी पुत्र कुंदन लाल सोनी के 13 वर्षीय पुत्र सत्यम सोनी को विगत छह माह से बोन कैंसर की शिकायत हुई। जिसके बाद हीरा सोनी बच्चे को लेकर कैंसर इंस्टीट्यूट जियामऊ में दिखाया। उसके बाद पीड़ित कई अस्पतालों के चक्कर लगाकर परेशान हो चुका अब राम मनोहर लोहिया कैंसर हॉस्पिटल मे इलाज चल रहा है।

हीरा सोनी की घड़ी बनाने की दुकान फुटपाथ पर लालता की बर्तन की दुकान के सामने है। किसी तरह से वह अपनी गुजर बसर कर रहा है, ऊपर से बच्चे की इस भयंकर बीमारी ने पूरे परिवार को तबाह कर के रख दिया।पीड़ित हीरा सोनी ने बताया बछरावां चेयरमैन शिवेंद्र सिंह उर्फ राम जी साक्षात हमारे लिए भगवान के समान है उन्होंने दुख की इस घड़ी में कई बार आर्थिक मदद किया है और आज भी सुबह आर्थिक मदद की और बच्चे के लिए रक्तदान कर, उसके जीवन को बचाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

ऐसे हैं हमारे बछरावां नगर पंचायत के अध्यक्ष काश अगर शिवेंद्र सिंह उर्फ रामजी की तरह अन्य जनप्रतिनिधि स्वयंसेवी संस्थाएं और समाजसेवी लोग अगर आगे बढ़कर इस गरीब की मदद करें। तो निश्चित ही उसके बच्चे का अच्छा इलाज हो सकता है और उसको नया जीवन मिल सकता है। आर्थिक तंगी से गुजर रहे बच्चे के माता पिता को कुछ इस समय सूझ नहीं पड़ रहा है। बालक के रक्तदान के लिए अध्यक्ष महोदय पहले ओ पी चौधरी हॉस्पिटल लखनऊ जाकर रक्त दान किए तब ही बालक को खून चढ़ाने के लिए उसके माता-पिता को मिला।

अभी पूर्व में पयामे में इंसानियत फोरम द्वारा निराला की लड़के का कैंसर का इलाज संस्था ने कराया था। उसके पिता ने संस्था से अपील की है कि कोशिश करके मेरे पुत्र सत्यम सोनी उम्र 13 वर्ष का इलाज की व्यवस्था करा कर हमारी पीड़ा को अपनी पीड़ा समझ कर कष्ट दूर करने का उपाय करें।वहीं हीरा सोनी ने क्षेत्रीय विधायक राम नरेश रावत से मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद दिलाने के लिए भी गुहार लगाई लेकिन प्रयास ना होने के कारण नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। जनप्रतिनिधियों को ऐसे मामलों को संज्ञान में लेकर तत्काल मदद करनी चाहिए लेकिन पीड़ित के साथ ऐसा नहीं हुआ।

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