वन विभाग ने आक्सीजन पार्क के लिए कटवा दिए

वन विभाग ने आक्सीजन पार्क के लिए कटवा दिए

बांदा

शहरवासियों के लिए शुद्व वायु का प्रबंध करने के लिए प्रशासन ने सरदार बल्लभभाई पटेल आक्सीजन पार्क निर्माण की रूपरेखा तय की। प्रस्तावित जमीन की झाड़ी आदि सफाई के नाम पर वन विभाग ने तो हरे पेड़ ही कटवा दिए। शीशम,इमली, नीम आदि के दर्जनों पेड़ जमीन जमींदोज कर दिए गए। लोगों का कहना है कि वन विभाग ने हरे पेड़ कटवाकर गलत किया है।

शहर में नवाब टैंक के पास आक्सीजन पार्क का निर्माण होना है। यह पार्क मौजूदा कलेक्टर का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस पार्क को लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क की तरह बनाने की कार्ययोजना है। पिछले दिनों डीएम ने प्रस्तावित जमीन पर झाड़िया साफ करने को कहा तो वन विभाग ने झाड़िया तो कम साफ की पर बड़े-बड़े हरे पेड़ जरूर कटवा दिए।

सूत्रों के मुताबिक इन पेड़ों को ठेकेदार के माध्यम से कटवाया गया है। इस लकड़ी को वन निगम को देने बात कही गई पर अभी भी इसमें संशय बरकरार है। आरोप है कि यहां तैनात अफसरों ने मनमाने पेड़ कटवाए है। सफाई की आड़ में यह मनमानी की गई है। इनकों इतनी जल्दीबाजी में कटवाया गया

कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाया। लकड़ी भी मौके से हटवा दी गई है। पेड़ के ठंूठ खड़े नजर आ रहे है। इस नर्सरी से बड़े पैमाने पर सूखी लकड़ी इन दिनों बेंची जा रही है। पेड़ों की छोटी छोटी डालें अभी भी मौके पर पड़ी है। लोगों का कहना है कि जब आक्सीजन देने वाले पेड़ ही नहीं रहेंगे तो आक्सीजन कहां से मिलेगी।

यहां वन विभाग की नर्सरी का कुछ हिस्सा पार्क में आता है। यहां बबूृल की कंटीली झाड़ियां जस की तस है। बड़ी बड़ी झांड़िया इतनी ज्यादा है कि वहां लोग आ जा नहीं सकते है। डीएम हीरालाल ने कहा कि झाड़िया साफ करने की बात हुई थी। बड़े पेड़ तो काटने ही नहीं है।

रेंजर श्यामलाल का कहना है कि यहां कुल करीब 44 पेड़ कटे है। इनमें इमली, शीशम आदि है। इसे बकायदा वन निगम को लाट देकर कटवाया गया है। इसमें पीपल, आम आदि के पेड़ नहीं है। पार्क के लिए नर्सरी के हिस्सेवाली जमीन खाली कर दी गई है।

  • ऐसे में तो नहीं मिलेगी आक्सीजन

आक्सीजन पार्क में पेड़ों को काटकर शुद्व वायु का प्रबंध प्रशासन कैसे करेंगे। यह सवाल लोगों के जेहन में कौध रहा है। क्योंकि नए पेड़ तैयार करने में कई साल लग जाएंगे। सामाजिक कार्यकर्ता महेश का कहना है कि इस प्रकार पेड़ों की कटान की जांच होनी चाहिए। यह भी कारण पता लगाएं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बड़े पेड़ों को क्यों काटा गया है।                            

मुनीश मोहम्मद -बांदा

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