जरर व लहुरेटा खदान मेें खूनी संघर्ष के आसार  दोनों खदानों में गरज रहीं मशीनें, तड़तड़ा रहीं गोलियां 

जरर व लहुरेटा खदान मेें खूनी संघर्ष के आसार  दोनों खदानों में गरज रहीं मशीनें, तड़तड़ा रहीं गोलियां 
 जरर खदान में गरज रहीं प्रतिबंधित लिफ्टर मशीनें 

जरर व लहुरेटा खदान मेें खूनी संघर्ष के आसार 

दोनों खदानों में गरज रहीं मशीनें, तड़तड़ा रहीं गोलियां 

दोनों गांवो के लोगों की बालू माफियाओं से बढ़ी रार 

बांदा।

लाल बालू के काले कारोबार में असलहों की उतनी ही अहमियत है जितनी बालू खदान में पोकलैंड, जेसीबी और लिफ्टर मशीनों की। यही वजह है कि बालू खदानों में मशीनी दैत्य गरज रहे है और रोजाना किसी न किसी खदान में गोलियां तड़तड़ा रहीं है।

नरैनी तहसील क्षेत्र की जरर और लहुरेटा खदान में ग्रामीणों और बालू माफियाओं के बीच रार इतनी बढ़ चुकी है कि कभी भी यहां खूनी संघर्ष हो सकता है। शायद प्रशासन और पुलिस महकमें को इसी का इंतजार है। 


बता दें कि जिले की केन, बागेन और यमुना नदियों में छोटी बड़ी मिलाकर लगभग 39 बालू खदानें संचालित है। ज्यादातर खदानों में पूर्वांचल के बडे़ बालू माफिया मशीनों के जरिए नाजायज खनन कर चित्रकूट मंडल की खनिज संपदा लूट रहे है। खदानों के बेरोक-टोक संचालन के लिए खदानों में किराए के असलहाधारियों की तैनाती की गई है।

खदानों के इलाकाई गांवो में बालू माफियाओं का खौफ है। वजह है कि पुलिस और प्रशासनिक गठजोड़ के चलते यह बालू माफिया एनजीटी के नियमों की न केवल धज्जियां उड़ा रहे है बल्कि ओवरलोडिंग के जरिए जिले की सड़कों की बखिया उधेडे़ दे रहे हैं। किसानों के खेतों को रौंदे डाल रहे हैं। विरोध करने पर उन पर गोलियां बरसा रहे है। ग्रामीणों की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। नरैनी तहसील की लहुरेटा खदान में बालू खनन के पहले दिन से ही नियम कानून दफन कर दिए गए है।

यहां सीमांकन लांघ कर काफी बडे़ क्षेत्र में मशीनों से जलधारा के बीच खनन कराया जा रहा है। गांव को केन की बाढ़ से बचाने वाली मिट्टी की बड़ी बड़ी कगारें काटकर ट्रकों को गुजारने के लिए बडे़ बडे़ रास्ते बना दिए गए है। आने वाली बरसात में लहुरेटा गांव के डूबने का खतरा बढ़ा दिया गया है। उधर, जरर खदान की बात करें तो यहां कई मशीनों के साथ तीन लिफ्टर खुलेआम चलाए जा रहे है। केन की जलधारा को रोक ट्रकों के लिए बडे़ बडे़ रास्ते बनाए गए है।

इस खदान में भी आए दिन ग्रामीणों को दहलाने के लिए खदान संचालक के गुर्गें दारूबाजी कर गोलीबारी करते हैं। लहुरेटा और जरर गांव के लोगों में इन खदान संचालकों के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश है। प्रशासन भले ही इसे नजरअंदाज कर रहा हो लेकिन इन गांवो में जिस तरह का तनाव है उससे कभी भी इन खदानों में खूनी संघर्ष हो सकता है। ऐसा हुआ तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी। 
 

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