शिक्षा का उद्देश्य नौकरी नहीं होना चाहिए:प्रदीप यादव

शिक्षा का उद्देश्य नौकरी नहीं होना चाहिए:प्रदीप यादव

बांका:(ललित किशोर कुमार)

आज के युग में लोग पढ़ लिखकर अच्छी सी नौकरी और अच्छी सी जिन्दगी जिना चाहतें हैं।इस भाग दौर के जिन्दगी में हर लोग चाहते हैं कि शिक्षा को मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर भविष्य बनाना।लेकिन आज इस आर्थिक युग में शिक्षा दिन प्रतिदिन बाजारीकरण होते जा रहा है।

इसी तथ्यों को जानने और समझने के लिए हमारे बिहार स्वतंत्र प्रभात के स्टेट हेड ललित किशोर कुमार ने बिहार की सबसे बड़ी राजनीति पार्टी के छात्र राजद के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप से बातचीत की।बातचीत के क्रम में प्रवक्ता प्रदीप यादव ने बताया कि आज शिक्षा का उद्देश्य नौकरी बना हुआ है।

स्कूल और कालेज में प्रवेश करतें समय छात्रों के सामने एक ही उद्देश्य रहता है नौकरी करना।अभिभावक भी उन्हें इसी आशा से पढ़ाते हैं की हमारा बच्चा कोई नौकरी करेगा। शिक्षा क्षेत्र में फैला हुआ ये दृष्टिकोण न केवल अत्यंत दोषपूर्ण हैं ,वरन भगवती विद्दा का एक प्रत्यक्ष अपमान है।

 शिक्षा का उद्देश्य नौकरी नहीं होना चाहिए

प्रदीप यादव ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने में होता था कि नौकरी के लिए लोग पटवारी,दरवारी, चौकीदार की नौकरी करतें थें।और उस समय इन लोगों को समाज सम्मान दृष्टिकोण से देखते थे। लेकिन आज शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नौकरी ही नहीं होनी चाहिए।शिक्षा का उद्देश्य होनी चाहिए नैतिक शिक्षा समाजिक शिक्षा भी होनी चाहिए।

 नैतिक शिक्षा धीरे-धीरे समाप्त हो रही है

जब हमारे स्वतंत्र प्रभात के स्टेट हेड ललित किशोर कुमार ने छात्र राजद के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप यादव से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि आज स्कूल़ो और काॅलेजों से नैतिक शिक्षा को पुरी तरह से खत्म कर दिया। प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पुराने समय में नैतिक और सामाजिक शिक्षा का पाढ़ बच्चों को पढ़ाया जाता था।जिससे उसमें समाजिक , सांस्कृतिक वातावरण का भाव जागृत होती थी।लेकिन आज व देखने को नहीं मिलता है।

 सकारात्मक पहलुओं को छोड़ गलत दिशा में जा रहें युवा

परंतु आज इस डिजिटल और सोशल युग में दिन प्रतिदिन नैतिक और सामाजिक शिक्षा को युवा पीछे करतें जा रहें हैं।जिससे कम आयु के युवाओं में नैतिकता के घोर कमी देखी जा रहीं हैं।उसमें ईर्ष्या ,द्वेष ,नाकारात्मकता का भाव उत्पन्न हो रहें हैं और वो धीरे- धीरे परिवार और समाज से दूर होते जा रहे हैं।जिससे समाज में विकृत मानसिकता के युवा पैदा होते जा रहें हैं।हाल फिलहाल बिहार के नालंदा राजगीर में एक युवती से गैंगरेप कर उसका वीडियो वायरल करना।किसी जाति या धर्म विशेष के लोग को घेरकर माॅब लीचिंग जैसे घटना को अंजाम देना।इसके प्रत्यक्ष उदाहरण है।इसलिए स्कूलो में पुनः नैतिक और सामाजिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू करनी ही होंगी।

 रोजगार के लिए युवाओं पर बल देना होगा

साथ ही देश के उच्च संस्थानों में भी अब स्किल डेवलपमेंट  स्वरोजगार को बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए। इस शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देना होगा।जिसे युवाओं में पढ़ाई के साथ ही साथ स्वरोजगार का विकल्प सामने आएगी।बापू की जहां 150 जयंती पुरा देश मना रहा।उनका जो सपना था

देश के युवाओं को स्वरोजगार के लिए आगे लाने का उसको पुरा करना होगा , तब जाकर हमारा समाज ,हमारा देश इस शिक्षा पद्धति से आगे बढ़ेगा।नहीं तो हर साल लाखों की संख्या में युवा स्नातक होते हैं।यदि सभी का मकसद सिर्फ नौकरी ही रहेंगी,तो एक दिन नौकरी और नौकर बनने के लिए कहीं युद्ध ना हो जाए।

 

 

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