धार्मिक आयोजन वर्तमान परिवेश मे अपने मूल उद्देश्य भटक गया है

 धार्मिक आयोजन वर्तमान परिवेश मे अपने मूल उद्देश्य भटक गया है

गोंडा

पवन कुमार द्विवेदी  

            वर्तमान समय मे लोगो ने धार्मिक आयोजन करके अपनी निजी स्वार्थों को साध रहे है ।आज कल लोग धार्मिक आयोजन कर अपने धन बल ,बाहुबल व सामाजिक बल को दिखाते है ।मेरी ताक़त इतनी है ।वही उसकी आड़ में अपनी रोजी रोटी सेकते है ।लोग धर्म के नाम पर एक मंच पर इकट्ठा भी हो जाते है ।

भगवान की पूजा करना उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलना गलत नही है ।लेकिन धर्म के नाम पर पाखंड करना व धर्म का दिखावा करना व अपने आप को सर्वश्रेष्ठ दिखाना यह सही नही है ।जहाँ एक तरफ किसी गरीब सीधे लोग से निवाला छीन कर धार्मिक आयोजन कर पैसे को पानी की तरह बहाना तर्क संगत नही हो सकता है ।

आज कल कथा का आयोजन कराना एक प्रचलन बनता जा रहा है ।वही कथा सुनने व उसका जीवन मे उतारने से कल्याण हो सकता है ।लेकिन देखने मे दूसरा पहलू नजर आ रहा है कि कथा को ज्यादा से ज्यादा दिखाने की होड़ लगी है उसके कई मद्यमो का प्रयोग किया जा रहा है ।जबकि कथा कराने का जो मूल उद्देश्य है वह कही दिखाई नही दे रहा है ।

जिसकी एक बानगी मैने इटियाथोक के पास एक ग्राम पंचायत में चल धार्मिक आयोजन में उपरोक्त कहावत चरितार्थ दिखाई दे रही है ।जिस तरह कार्यक्रम आयोजन को लेकर प्रचार प्रसार किया गया उस मुताबिक न तो व्यवस्था ही दिखी और न ही अपेक्षित कथा प्रेमी ही जुट रहे है ।यह कथा किस उद्देश्य से कराई जा रही यह उद्देश्य भी समझ मे नही आ रहा है ।क्षेत्र में और कई कथा में जाने का मौका मिला उसका इस तरह प्रचार प्रसार नही किया गया उसके बाद भी ठीक ठाक कथा प्रेमी जुटे ।

वही कथा प्रेमियो के लिए प्रसाद भोजन की भी व्यवस्था भी रही ,लेकिन यहाँ इन सभी चीजों का अभाव रहा ।यह तो एक बानगी है ऐसे ही कही जगह धार्मिक आयोजन होते है जिसका समाज से कोई सरोकार नही होता है ।मेरी नजर में धार्मिक आयोजन का जो उद्देश्य है कि लोगो में धर्म के प्रति आस्था जागृत हो ,लोग आस्तिक हो और भगवान पर विस्वास करे और लोगो के अंदर मानुस प्रवृत कायम रहे है ।भगवान की नजर में सब समान है ।लेकिन यहाँ वह मूल प्रवृत्ति का अभाव ही दिखाई दे रहा है ।

विशेष कर कथा आयोजक के अंदर उपरोक्त प्रवृत्ति का अभाव ही दिखाई दे रहा है ।तो फिर ऐसे खर्च वाले आयोजन कराने के मकसद केवल अपनी सान सौकत दिखाने के अलावा कुछ नही ।अगर वास्तव में धार्मिक आयोजन के मूल उद्देश्य पर जाना है तो अपने अंदर प्रेम भाव पैदा करना है ।सभी को एक समान मानना होगा तब अधिक से अधिक कथा प्रेमी जुटेंगे और कथा का आयोजन भी सफल होगा ,और लोगो के अंदर धर्म के प्रति आस्था बढ़ेगी ।    

  यह मेरा अपना विचार है हो सकता कुछ लोग इससे सहमत न हो ।

Loading...
Loading...

Comments