बदहाली और उपेक्षा का शिकार है राम चरित्र मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि

बदहाली और उपेक्षा का शिकार है राम चरित्र मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि

  अतीक राईन के साथ रितेश गुप्ता की रिपोर्ट


करनैलगंज,गोण्डा -

तहसील मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित राम चरित्र मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि प्रशासन की अनदेखी के कारण बदहाल और उपेक्षा का शिकार हैं।


      रामचरित मानस की रचना कर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को जन नायक बनाने वाले संत गोस्वामी तुलसी दास की जन्मस्थली राजापुर धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टिकोण से महत्पूर्ण होने के बावजूद शासन प्रशासन की उपेक्षा का शिकार है। मंदिर की हालात जर्जर हो चुकी है l

पर्यटन स्थल होने के बावजूद पर्यटकों के लिए कोई मूलभूत सुविधा नही है मन्दिर तक आने जाने वाली रोड़ कभी खस्ता हाल है तुलसीदास जी की जन्मभूमि अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। कुछ वर्ष पूर्व विश्व विख्यात संत मोरारी बापू के मुखारविंद से राम कथा का कार्यक्रम भी इस स्थल पर हो चुका है। कई सरकारे आयी और गयीं किन्तु किसी ने गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि का विकास करना उचित नही समझा।


गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म संवत 1554 में सावन मास की सप्तमी को भगवान श्री राम की जन्मभूमि आयोध्या से लगभग 55 किलोमीटर दूरी पर सरयू की किनारे बसे के राजापुर ग्राम में हुआ था। तुलसीदास जी का जन्म होते ही इनके माता हुलसी और पिता आत्मा राम का निधन हो गया। जिससे इनका पालन पोषण गुरु नरहरिदास द्वारा किया गया। तुलसीदास के जन्मभूमि के कुछ दूरी पर गुरु नरहरिदास का भी आश्रम है। गुरू नरहरिदास का आश्रम भी प्रशासन के अनदेखी के कारण अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।


गोस्वामी तुलसीदास के जन्मभूमि को कुछ विद्वान अलग अलग स्थानों पर मानते है लेकिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने स्वयं अपनी जन्मभूमि का प्रमाण गीतावली, रामचरित मानस आदि ग्रन्थों में दिया है। तुलसीदास ने अपने जन्मभूमि के बारे में कवितावली में लिखा है'तुलसी तिहारे घर जायो है घर को।

इसके माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास भगवान श्रीराम से कहते हैं कि प्रभु जहां आप पैदा हुए हैं वहीं मेरा भी जन्म स्थान है। बता दें राजापुर गांव पहले अवध क्षेत्र के अंतर्गत पड़ता था। यह अयोध्या की चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग में है। परिक्रमा करने वाले सैकड़ों संत-महात्मा यहां परिक्रमा के दौरान रुकते हैं।

केंद्र और प्रदेश सरकार धार्मिक और तीर्थ स्थलों के विकास के लिए सतत प्रत्यनशील है.अब देखना है कब सरकार द्वारा गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर का विकास कर मुख्य धारा से जोड़ती है।

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