सार्थक संस्कृति सोसायटी द्वारा फिल्म जगत में महारिब की बेमिसाल पेशकश

लखनऊ :-

राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर में सार्थक सांस्कृतिक सोसायटी द्वारा बुद्धा रिसर्च प्रेक्षागृह में उत्तर प्रदेश की पहली हिन्दी फीचर फिल्म महारिब की लांचिंग किया। जिसका पूरा निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश में संपन्न हुआ।

 एक तरफ जहां आधुनिक फिल्मों ने करोड़ों खर्च कर भर भर फूहड़ता पेश की जाती है तो दूसरी तरफ छोटे बजट में बनी इस फिल्म महारिब भारतीय संस्कृति एवं जियो और जीने दो के नार को बुलंद करती नजर आ रही है।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रदेश के फिल्म निर्माता राजेश जयसवाल जी ने किया विशिष्ट अतिथि के रूप में महेंद्र भीष्म, छेदीलाल जी, सुचिता तिवारी जी, जेपी बाल्मीकि जी, गणेश बाल्मीकि, ऋतुराज अजमत अली जी उपस्थित में हुआ।

यह फिल्म आतंकवाद जैसे गंभीर एवं विश्वव्यापी समस्याओं पर केंद्रित है। 


महारिब फिल्म संदेश देती है कि आतंकवादी भी इंसानी रूप में ही जन्म लेते हैं मगर इस स्वार्थी दुनिया के कुछ लोग उन्हें गलत रास्ते पर चलने को मजबूर कर देते हैं। अगर कोशिश की जाए तो उन्हें सही रास्ते पर लाया जा सकता है गांधी जी के विचार "घृणा पाप से करो पापी से नहीं" पर आधारित महारिब इस्लाम की एक नई परिभाषा गढ़ ती है

महारिब कहानी है पांच आतंकवादियों की जो अपने मिशन में नाकामी के बाद अपनी जान बचाने की खातिर यह लोग एक अनजान जंगल में भागते हैं और भटक जाते है। वहां उन्हें एक शिकारी मिलता है जो उन्हें जंगल से बाहर निकालने का वादा करता है इसके बाद फिल्म की कहानी और भी रोमांचक हो जाती है।

 सार्थक सांस्कृतिक सोसाइटी के अध्यक्ष एसके प्रसाद जोकि इस फिल्म के निर्माता-निर्देशक भी हैं, उन्होंने बताया कि इस शो करने के पीछे का मकसद यह है कि उत्तर प्रदेश के जो कलाकार हैं। वह भी भारतीय सिनेमा का हिस्सा होते हैं उनका प्रदेश स्तर पर सम्मान होना चाहिए, और यही उनकी संस्था कर रही है।

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