​​​​​​​हिसार के पार्षद नरेंद्र शर्मा पंचतत्‍व में विलीन हुए, बेटे-बेटी ने दी मुखाग्नि, आखिरी विदाई पर उमड़ा पूरा हिसार शहर

 ​​​​​​​हिसार के पार्षद नरेंद्र शर्मा पंचतत्‍व में विलीन हुए, बेटे-बेटी ने दी मुखाग्नि, आखिरी विदाई पर उमड़ा पूरा हिसार शहर

हिसार ( सुरेन्द्र गिल )

सड़क हादसे का शिकार हुए वार्ड 19 (आजाद नगर) के पार्षद नरेंद्र शर्मा का मंगलवार की सुबह अंतिम संस्‍कार किया गया। नरेंद्र शर्मा पंचतत्‍व में विलीन हो गए। उनके बेटे और बेटी ने उन्‍हें मुखाग्नि दी।

वहीं उनकी आखिरी विदाई में शहर भर के लोग शामिल हुए। बता दें कि जनता की आवाज को नगर निगम में बुलंद करने वाले वार्ड 19 (आजाद नगर) के पार्षद नरेंद्र शर्मा की हिसार-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वे करीब 50 वर्ष के थे। वह सोमवार की दोपहर के समय बाडो पट्टी टोल प्लाजा के पास हादसे का शिकार हो गए। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

नरेंद्र शर्मा की सड़क हादसे में मौत की खबर सुनकर सभी सन्न रह गए। किसी को उनकी मौत पर विश्वास नहीं हुआ। क्योंकि वह मौत से कुछ घंटे पहले नगर निगम में अपने वार्ड के लोगों की समस्याओं के लिए अधिकारियों से मिलने आए थे। नरेंद्र शर्मा की दो बेटियां व एक बेटा है। एक बेटी वकालत कर रही है। पार्षद नरेंद्र शर्मा को हादसे के बाद शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया तो वहां पर शहर के मौजिज लोगों का जमावड़ा लग गया।

पार्षद नरेंद्र शर्मा को मुखाग्नि देते हुए उनकी बेटी व अन्‍य

डाक्टरों ने नरेंद्र शर्मा की जान बचाने की भरपूर कोशिश की मगर देर शाम करीब 8 बजे उन्होंने अपनी सांसे छोड़ दी। पार्षद नरेंद्र शर्मा रोजाना की तरह अपने वार्ड के लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए नगर निगम में जाने के लिए निकले थे। वह नगर निगम में दोपहर करीब दो बजे वार्ड के लोगों का काम करवा रहे थे। इसके बाद वे बरवाला कब और किस काम से किसी को इसके बारे में जानकारी नहीं है। देर रात तक भी उनकी मौत का समाचार परिवार के अधिकतर सदस्यों को नहीं दिया गया था।

हाउस की बैठकों में सबसे लंबी लिस्ट लेकर पहुंचते थे मेयर साहब हमारी बात सुनिए। पहले हमें हाउस की बैठक में अपने एजेंडे रखने दिजिए। बाद में पार्षद नरेंद्र शर्मा के एजेंडे सुनना। अक्सर हाउस की बैठक में यह मजाक साथी पार्षद नरेंद्र शर्मा के साथ करते नजर आते थे।

कारण था पार्षद नरेंद्र शर्मा के पास अपने एरिये में विकास की लंबी लिस्ट होती थी। जिसे गिनवाने में उन्हें लंबा समय लगता था। जनता के लिए विकास के कार्यों को करवाने के लिए हाउस की बैठकों में उन्होंने सर्वाधिक अपनी आवाज बुलंद की।

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