ईमानदार पुलिस कप्तान की  छवि पर बट्टा लगा रहे हैं  विभागीय अधिकारी और कर्मचारी

ईमानदार पुलिस कप्तान की  छवि पर बट्टा लगा रहे हैं  विभागीय अधिकारी और कर्मचारी

ईमानदार पुलिस कप्तान की  छवि पर बट्टा लगा रहे हैं  विभागीय अधिकारी और कर्मचारी

पहले भी  बदनाम रहे हैं  हाईवे किनारे के  पुलिस कर्मचारी

सेटिंग गेटिंग के खेल पर पास होती हैं गाड़ियां

 

हर जगह का बंधा हैं निश्चित सुविधा शुल्क

फतेहपुर जनपद के तेज तर्रार साफ सुथरी छबि के लिए जग जाहिर पुलिस अधीक्षक कैलाश सिंह भले ही महकमे में सुधार की दिशा में कड़े से कड़े कदम उठाने से गुरेज न कर रहे हो किन्तु उनके विभागीय पुलिस कर्मी ही  उनकी साख पर  पलीता लगा रहे हैं 

यह विभागीय पुलिसकर्मी उनके दिशानिर्देशों का कितना अनुपालन का रहे है यह तो सभी को दिखाई पड़ रहा है, पुलिस कप्तान के लाख प्रयास करने के बाद भी पुलिस की कार्यशैली में कोई भी अंतर आता नहीं दिखाई पड़ रहा है जब बहुत सख्ती होती है तो दो-चार दिन के लिए मोहकमा राइट टाइम हो जाता है लेकिन जल्दी ही  वह आपने  पुराने ढर्रे पर आ जाता है रोज ही देखने को मिलता है की चाहे ट्रक ओवरलोड हो  चाहे उसमें कुछ भी लड़ा हो पुलिस को उसका हिस्सा दीजिए और बिना किसी डर के आराम से निकल जाइए

इसी तरीके से जब गाड़ी में जानवर लदे होते हैं तो देखा जाता है की सेटिंग करने के लिए आगे आगे छोटी गाड़ी में उनके आका चलते हैं और वह सेटिंग करते जाते हैं गाड़ी आगे बढ़ती चली जाती है कभी-कभी तो उनके आका फोन पर ही सभी थानों को सेट कर लेते हैं इसमें परेशानी इसलिए नहीं आती है की लगभग हर चीज का भाव पहले से तय है और विशेष तरीके के दलालों माफियाओं को पुलिस विशेष प्रकार का सम्मान भी देती है क्योंकि उनकी काली कमाई का दाता भी वही होते हैं

देखने को तो हर थानों में देखा जा सकता है की "दलालों का प्रवेश वर्जित है" परंतु वास्तविकता यह है कि बिना दलाल के पुलिस का काम ही नहीं चलता जब एक पुलिस कर्मचारी से बात किया गया तो उसने नाम ना बताने की शर्त पर दबी जुबान पर यह बताया कि यह पैसा केवल हम थोड़े ही खाते हैं इसका एक निश्चित हिस्सा निश्चित लोगों तक नीचे से लेकर ऊपर तक पहुंचाना पड़ता है तभी तो हाईवे पर विशेष थानों में मलाईदार जगहों पर पिकेट पर पोस्टिंग होती है और अधिकारी की विशेष कृपा भी हमारे ऊपर बनी रहती है बिना इसके पुलिस विभाग में केवल पुलिस लाइन में ही आसरा मिलता है और आप तो जानते हैं कि खर्चे कितने बढ़ गए हैं

अगर ऊपरी कमाई नहीं होगी तो जिंदगी की नैया कैसे पार होगी इसलिए सब कुछ जानते हुए भी ऐसा करना पड़ता है आये दिन मीडिया में पुलिस की करतूतों की खबरे मीडिया की हेडलाइन में रहती हैं  इसी से पुलिस की कार्यशैली  का पता लगया जा सकता है यदि जनपद के चौडगरा औंग जहानाबाद बिंदकी ललौली गाजीपुर हुसेनगंज सहित अन्य हाईबे की पुलिस थाना चौकी अगर पुलिस कप्तान के निर्देशों का सही से पालन करे तो क्या मजाल आर्थिक अपराधों पर नकेल न कसा जा सके 

      हालकि पुलिस अधीक्षक अपने स्तर पर समय-समय पर पुलिस थानों का औचक निरीक्षण कर पुलिस को चुस्त दरुस्त रखने की दिशा में आवश्यक दिशा निर्देश जारी करते देखे जा सकते है और हमेशा  विभाग की  बेहतरी  के लिए  प्रयासरत रहते हैं किंतु उनकी  भाग दौड़ निरर्थक साबित होती जान पड़ रही है लिहाजा आर्थिक अपराधों के क्रम में ओवरलोड ट्रकें जानवरो की गाड़ियां बेखौफ और निर्वाध गति से बिना किसी डर भाई के फर्राटा भर्ती देखी जा सकती हैं

अगर सूत्रों की माने तो ये गाड़ियां सुबह  मुँह अंधेरे का काफिला अपने गंतब्य स्थलों की ओर रवाना होता है बताया जाता है कि किसी भी प्रकार की समस्या को लेकर गाड़ी के काफिले से पहले चौडगरा कस्बा में लोग लग जाते है उन्ही के इशारे पर गाड़ियां बेखौफ निकलती है

हास्यप्रद बिषय है कि जर्रे जर्रे पर निगाह रखने वाली पुलिस की निगाह इन तक क्यों नहीं पहुंचती है और पुलिस के हाथ आखिर इनके गिरेबान तक क्यो नही पहुँच रहा है अब देखने वाली बात यह होगी किस जिले के पुलिस कप्तान अपने मातहतों की कार्यशैली में कितनी तब्दीली ला पाते हैं

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