कानपुर जिले में घटा कुपोषण का ग्राफ

कानपुर जिले में घटा कुपोषण का ग्राफ

कानपुर जिले में घटा कुपोषण का ग्राफ


सफलता:
लाल श्रेणी में 1480 बच्चे चिन्हित 
अतिकुपोषित 86.88 व कुपोषित बच्चों में 56.06 % सुधार  

संवाददाता नरेश गुप्ता


कानपुर, 18 सितम्बर 2019 
जिले को कुपोषण से मुक्ति दिलाने को चलाया जा रहा अभियान रंग लाने लगा है। इसके चलते कुपोषण का ग्राफ घटने लगा है | पिछले वर्ष की तुलना में अति कुपोषित व कुपोषित बच्चों की संख्या 50 फीसदी से भी अधिक सुधार हुआ है। जहाँ एक ओर अतिकुपोषित बच्चों का सुधार प्रतिशत 86.88 है वहीं  कुपोषित बच्चों में 56.06 प्रतिशत सुधार है। 
वर्तमान में जिले में संचालित 2134 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पांच साल तक के दो लाख 10 हजार 926 बच्चे पंजीकृत हैं। खास बात यह है कि इस समय कुपोषण की लाल श्रेणी में मात्र 1480 बच्चे रह गए हैं। जबकि पीली श्रेणी में 28110 बच्चे शामिल हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ज़फर खान ने बताया कि जनपद में बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए चलाया जा रहा अभियान जारी है। उन्होने कहा कि पोषण अभियान ही असल में कुपोषण के खात्मे का जरिया बन सकता है | पोषण माह के दौरान ग्रामीण स्तर पर घर-घर पोषण जागरूकता कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है। 
समेकित बाल विकास योजना (आईसीडीएस)  के अनुसार  जनवरी 2018 से  अगस्त 2019 तक कुल 11283 बच्चें लाल श्रेणी यानी अतिकुपोषित पाये गए। इनमें  9803 बच्चे पीली श्रेणी यानि कुपोषित बच्चों की श्रेणी में आये हैं। साथ ही 1480 अतिकुपोषित बच्चे अवशेष हैं। माह जनवरी 2018 से माह अगस्त 2019 तक कुल 63976 बच्चें पीली श्रेणी यानी कुपोषित पाये गए जिनमें 35866 बच्चे हरी श्रेणी यानि सामान्य बच्चों की श्रेणी में आये हैं। साथ ही 28110 कुपोषित बच्चे अवशेष हैं। जिले भर में पोषण माह के प्रथम दिवस पांच साल तक के बच्चों कुल 2,02,572 बच्चों का वजन  किया गया।
 29590 लड़ रहे कुपोषण की जंग 
वर्तमान में जनपद के कुल 29,590 कुपोषण की जंग लड़ रहे हैं। वृद्धि चार्ट के अनुसार लाल श्रेणी यानी अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 1480 पाई गयी । वहीं पीली श्रेणी यानी कुपोषित बच्चों की संख्या 28110 है। जनपद कानपुर को ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र में बाँटा गया है। जिसमें शहरी क्षेत्र के दो हिस्से हैं शहर प्रथम और शहर द्वितीय। अतिकुपोषित बच्चों की संख्या सबसे अधिक परियोजना शहर प्रथम में 290 है। यहाँ कुपोषित बच्चों की संख्या 9315 है। इसके साथ ही अतिकुपोषित बच्चों की संख्या सबसे कम ब्लॉक ककवन की 56 है। 
घर-घर चल रहा पोषण अभियान
डीपीओ ने बताया की राष्ट्रीय पोषण माह में विभिन्न गतिविधियां हो रही  हैं । यह राष्ट्रीय कार्यक्रम जनहित का कार्यक्रम है, जिसमें हम सभी को बढ़चढ़ कर भाग लेना चाहिये, ताकि कुपोषण तथा गर्भवती माताओं एवं किशोरियों में रक्त की कमी को रोका जा सके। उन्होंने बताया की शेष दिनों में 19 सितंबर  को सुपोषण चैपाल, 20 सितंबर  को अन्न प्रासन दिवस, 21 सितंबर  सुपोषण गुंज, 23 सितंबर  को सुपोषण चैपाल, 24 सितंबर  को पोषण वाटिका, 25 सितंबर  को वी0एच0एस0एन0डी0, 26 सितंबर को लाडली दिवस, 27 सितंबर को सुपोषण झांकी, 28 सितंबर को वी0एच0एस0एन0डी0, सुपोषण गुंज तथा 30 सितंबर  को गोदभाराई एवं बाल सुपोषण उत्सव मनाया जायेगा।

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