तनाव से पैदा हो रही हैंबीमारियां : डॉ महेश

तनाव से पैदा हो रही हैंबीमारियां : डॉ महेश
  • विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस आज  थीम - "आत्महत्या को रोकने के लिए मिलकर काम करना"

कानपुर, 9 अक्टूबर 2019 प्रतिदिन के तनाव से उपजती और हर एक मिनट का हिसाब रखती, भागदौड़ भरी वर्तमान जीवनशैली में सबसे बड़ी और लगातार उभरती हुई समस्या है मानसिक तनाव।  यह कहना है राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी और एसीएमओ डॉ महेश का। तनावग्रस्त जीवनशैली में बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करने और इससे बचने के उपायों पर विचार करने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्टूबर को पूरे विश्व में ''विश्व मानसि‍क स्वास्थ्य दिवस'' के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व मानसि‍क स्वास्थ्य दिवस 2019 की थीम "आत्महत्या को रोकने के लिए मिलकर काम करना" पर केंद्रित है। ब्रहस्पतिवार को ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ के अवसर पर स्पास्टिक सेंटर (बाल भवन), फूलबाग में स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर लगा कर मानसिक रोगों और तनाव से बचने के उपाय बताये जायेंगे | साथ ही इलाज़ भी किया जायेगा। साथ ही स्कूलों में मेंटल हेल्थ कैंप के जरिये मनोचिकित्सकों द्वारा स्कूली बच्चों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के गुण बताए जाएंगे। 12 अक्टूबर को जुहारी देवी डिग्री कॉलेज, कैनाल रोड और 13 अक्टूबर को डीजी कॉलेज, सिविल लाइन्स स्कूल कार्यक्रम संगोष्ठी द्वारा तनावमुक्ति विषय पर जागरूकता पैदा करने के लिए विचार विमर्श किया जायेगा।

डॉ महेश कहते हैं हर किसी के जीवन में स्थाई रूप से अपने पैर पसार चुका तनाव, व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है।  निजी जिंदगी से शुरू होने वाला मानसिक तनाव कई तरह की अन्य समस्याओं को जन्म देने में सक्षम है। इससे बचने के लिए तनाव पैदा करने वाले अनावश्यक कारणों को जीवन से दूर करना जरूरी ही नहीं अनिवार्य है। साथ ही मानसिक बीमार व्यक्तियों को अकले नहीं छोड़ना चाहिए, उन्हें व्यस्त रखाना चाहिए। उनको खाली रखने के बजाय किसी न किसी गतिविधियों में शामिल करवाना चाहिए। जिला मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ के मनौचिकित्सक, डॉ चिरंजीवी बताते हैं कि यदि किसी व्यक्ति या उसके आस पास के लोगों में अवसाद के लक्षण दिखायी देते है तो उस पर सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि आस-पास के लोगों में लक्षण पाये जाएँ तो उनको जिला पुरुष चिकित्सालय, उर्सिला के कमरा नंबर 112 में मौजूद मन कक्ष या  मानसिक रोग क्लीनिक में लाएँ। उन्होने बताया की जिला मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ का हेल्पलाइन नंबर 7379374919  है इसपर सम्पर्क करके परामर्श लिया जा सकता है। 

यह भी जानें भारत सरकार ने सबके लिए न्यूनतम मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की उपलब्धता   सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 1982 में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनएमएचपी) की शुरुआत की थी। 10 अक्टूबर वर्ष 2014 को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति की घोषणा की गयी तथा भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 लाया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत किशोरावस्था प्रजनन और यौन स्वास्थ्य कार्यक्रम (एआरएसएच) वयस्कों से संबंधित विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है।

Comments