सिधौली कसमंडा  के बरेठी का पंचायत भवन हुआ खंडहर, कैसे तैयार हो विकास का खाका

सिधौली कसमंडा  के बरेठी का पंचायत भवन हुआ खंडहर, कैसे तैयार हो विकास का खाका

नरेश गुप्ता अमित मिश्रा की रिपोर्ट

सिधौली कसमंडा  के बरेठी का पंचायत भवन हुआ खंडहर, कैसे तैयार हो विकास का खाका

 कसमंडा सिधौली सीतापुर तमाम प्रयासों के बाद भी पंचायती राज व्यवस्था को पंख नहीं लग पा रहा है। विकास का खाका तैयार करने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर गांव देहात में बने पंचायत भवन खस्ताहाल हो गये हैं। फिलहाल बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के  जनपद सीतापुर  के विकास खंड  सिधौली  कसमंडा क्षेत्र के बरेठी गांव स्थिर पंचायत भवन की।

रखरखाव व मरम्मत के अभाव में भवन खंडहर का रूप धारण करने लगा है। इससे विकास योजनाओं का लाभ मिलना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

पंचायत भवन की हालात यह है कि मरम्मत व देखरेख नहीं मिलने के कारण दरवाजा व खिड़कियां गायब हो गई हैं। भवन की दीवार की दरकने के साथ ही प्लास्टर उखड़ गया है। बरसात के दिनों में छत झरने की तरह टपकने लगता है। विषैले जंतुओं समेत चमगादड़ों ने भवन को रैन बसेरा बना लिया है। समस्त गांव निवासीयो  का कहना है कि भवन में आए दिन बाहरी जुआड़ियों का जमघट लगा रहता है। इसके चलते लोगों खासकर महिलाओं का शाम को बाहर निकलना दु भर हो जात है। इनमें पैसे को बटवारे को लेकर अक्सर विवाद की नौबत उत्पन्न हो जाती है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का ध्यान इस ओर दिलाते हुए नये पंचायत भवन की अविलंब स्थापना करने की मांग की है।

क्या कहते हैं जिम्मेदरान

इस संबंध में ग्राम प्रधान ,, विनोद,, कहते हैं कि जर्जर भवन जमींदोज होने के कगार पर पहुंच गया है। जन चौपाल व खुली बैठक कराने की स्थिति में प्राथमिक विद्यालय का सहारा लेना पड़ता है। नये भवन के लिए संबंधित विभाग को पत्रचार किया जा चुका है। धन स्वीकृति होते ही निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

कहने को तो देश में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करके जनता को उसका अधिकार दिलाने के लिए सरकार द्वारा सतत प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर ही बैठकों का आयोजन करने के लिए लाखों खर्च करके मिनी सचिवालय और पंचायत भवनों का निर्माण भी करवाया गया। परंतु मौके पर इसका प्रभाव महज दिखावा बनकर रहता नजर आ रहा है। कुछ एक को छोड़कर सभी गांवों के पंचायत भवन गंदगी का घर बनकर बिना प्रयोग के ही ध्वस्त हो रहे हैंपंचायती राज व्यवस्था के अनुसार गांवों में विकास कार्यो के लिए रुप रेखा बनाने का कार्य सदस्यों के बीच खुली बैठक करके लिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए जिले भर की अधिकांश ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों का निर्माण करवाया गया था। भवन में पूरी साज सज्जा की व्यवस्था करने के साथ ही इसे ग्रामीणों के हित के लिए भी प्रयोग में लाने का निर्देश था।

पंचायत भवनों पर ग्राम पंचायत अधिकारी के बैठने की भी व्यवस्था निर्धारित किया गया था। परन्तु व्यावहारिक रुप से देखा जाय तो अधिकांश ग्राम पंचायतों में प्रयोग न होने के कारण उक्त भवन बेकार साबित हो रहे हैं। रंगाई पुताई के बाद भवन न खुलने से बरसात के पानी से दीवारों पर काई जमी हुई है। परिसर में भी गन्दगी का साम्राज्य है। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत भवनों पर ग्राम पंचायत अधिकारी भी नहीं बैठते हैं। उत्तर प्रदेश जनपद सीतापुर  के विकास खंड सिधौली  कसमंडा के ग्राम पंचायत बरेठी में भी बना हुआ पंचायत भवन बदहाल है। ग्राम पंचायत  में तो भवन ढहने के कगार पर है।

पुराने पंचायत भवनों की नहीं ली जा रही सुधि

त्रिस्तरीय पंचायत के सपने को साकार करने के लिए सरकार ने अलग-अलग गांवों में वर्षों पहले पंचायत भवनों का निर्माण कराया। ताकि, सरकार प्रायोजित विकास कार्यों का लाभ ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे मिल सके। लेकिन, विडंबना यह है कि लाखों रुपये खर्च करके बने ये पंचायत भवन देखभाल व मरम्मत के अभाव में बदहाली का दंश झेल रहे हैं।  यूपी के सीतापुर जनपद के विकासखंड सिधौली कसमंडा  के बरेठी  गांव स्थित पंचायत भवन सरकारी फाइलों में गुमनाम है। जर्जर भवन का प्रशासनिक स्तर पर कोई देखनहार तक नहीं है। ऐसे में बरेठी का यह पंचायत भवन ग्रामीणों के लिए सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गया है।

भवन में नहीं हो सकता कार्यों का संचालन :

बरेठी पंचायत में विकास से जुड़े कार्यों का संचालन पिछले कई दशकों से पंचायत भवन में नहीं होता है। इसके पीछे प्रमुख कारण भवन का बाहरी और  अंदरूनी हिस्सा जर्जर होना बताया जा रहा है। जबकि भवन की दीवारों में बड़े-बड़े होल हो चुके हैं ना तो दरवाजे हैं ना ही खिड़कियां हैं साथ ही भवन की छत पर बड़ा सा पीपल का पेड़ खड़ा हो चुका है सूत्रों के अनुसार भवन की मरम्मत के लिए सरकार से दुरुस्ती करण हेतु मोटी रकम प्रस्तावित की गई किंतु ग्राम प्रधान ने पंचायत भवन का निर्माण तो दूर की बात साफ-सफाई भी नहीं करवाई फलस्वरूप पंचायत भवन खंडहर बन चुका है भवन को मरम्मत कराने के लिए स्थानीय स्तर पर कई बार पहल की गई। पर, प्रशासनिक अधिकारियों के रुचि नहीं लेने से इसे  रूप नहीं दिया जा सका। आश्चर्यजनक बात यह है कि गांवों में पंचायत सरकार भवन बनाने के लिए प्रशासन जोर-शोर से अभियान चला रहा है। लेकिन, गांवों में पहले से बने पंचायत भवनों को चालू करवाने की दिशा में सकारात्मक पहल नहीं कर रहा है। फिलहाल, बरेठी का यह पंचायत भवन चुनाव के दौरान मतदान केन्द्र बनाने के योग्य भी नहीं है

Comments