गन्दी जगह नही गंदे लोग हैं साहब

गन्दी जगह नही गंदे लोग हैं साहब

नरेश गुप्ता

गन्दी जगह नही गंदे लोग हैं साहब


रिपोर्ट एहतिशाम बेग


पालिका द्वारा डस्टबिन लगाए जाने पर भी कूड़ा फेंका जा रहा कूड़ेदान के  बाहर 

लहरपुर सीतापुर 

लहरपुर की कहानी तो किताबों पर आधारित है। जैसे कि हमने भी सुना है और चुटकुलों कवियों के माध्यम से की एक परिवार का बेटा अपनी मौसी  के घर इंडिया आता है परिवार समेत इंडिया  आये तो कई बार शॉपिंग के लिए या घूमने के लिए कई बार  घूमने भी गए  तो उनके बच्चे अक्सर कागज़ या खाली पेपर प्लेट्स या गिलास सड़क पर ही फ़ेंक देते थे क्योंकि यह उनकी मॉडर्न व पढ़ी-लिखी NRI माँ की शिक्षा जो थी।

क्योंकि एक बार उनके बेटे ने पूछा ,”माँ ,पेपर फेंकना है डस्टबिन कहाँ है ,” उन देवी जी के कहना था ,” बेट्टा ,यह इंडिया है , यहाँ डस्टबिन में फेकना जरूरी नही हैं ।यहाँ कही भी फेंक दो ।” यह इंडिया है गौरतलब है कि सिर्फ बाहर रहने भर से लोगों में तहजीब नही आ जाती । संस्कार भी बहुत ज़रूरी है वो मिलता है शिक्षित परिवार से यही हाल है लहरपुर कस्बे का साहब  यहां कोई जगह गन्दी नहीं होती गंदे दरअसल यहां के रहने वाले लोग हैं।कोई भी जगह खुद से गंदी नही होती ...बल्कि वहां के रहने वाले इसके लिये जिम्मेदार होते है।

एक कहावत है कि कुता भी अपनी पूँछ से ज़मीन साफ करके बैठता है तो हम तो फिर भी इंसान है अभी कुछ दिन पहले ही लहरपुर पालिका द्वारा नए कूड़ेदान हर धार्मिक स्थलों व चौराहों व मकानों के बाहर लगाए गए हैं। फिर भी यहां की जाहिल जनता कूड़ेदान में कूड़ा न डालकर बाहर अपनी छतों से फेंक देती है जो पूरी सड़क पर फैल जाता है । यह नज़ारा लहरपुर के मोहल्ला चौपड़ी टोला भग्गा खान, तसव्वर खान की गली का है और कूड़ेदान वज़ीर अहमद के घर के बाहर लगा हुआ है । आसपास के लोगों की हरक़त देखकर कर आप अंदाज़ा लगा सकते हैं। की तहज़ीब और संस्कार की कितनी ज़रूरत है इन पड़ोसियों को कैसे बाहर का आने वाला मुसाफिर लहरपुर दाखिल होते ही सबसे पहले कूड़े के बड़े बड़े पर्वत जैसे ढेर और बदबू ।सूंघकर अपना स्वागत करवाता है । शायद फेंकने वाले के खुद के अपने मेहमान आते होंगे । इनके आने पर कितना बुरा प्रभाव पड़ता है पर यहाँ इसका कोई हल शायद नही सोचता  । यहां हर जगह  पान की पीक ,थूक के धब्बे पॉलिथीन व खाली बॉटल्स के ढेर ......हर तरफ कूड़ा ही कूड़ा .....गंदगी ही गंदगी नज़र आती है अब सब कुछ सरकार तो नहीं कर सकती न। सरकार के सफाईकर्मी तो दिन में एक बार सुबह सफाई कर देते है पर क्या हम लोग पूरा दिन उसे वैसा ही रहने देते है ....फिर मुँह बिचका के ,नाक भौं सिकोड़ के झट से बोल देते है कि बाहर के देशों और शहरों जैसी साफ़ सफाई व सुविधा हमारे यहाँ तो कभी हो ही नहीं सकती।

परंतु कोई यह नहीं सोचता कि वहां के नागरिक भी तो अपनी सरकार का पूरा साथ देते है और सारे नियम कायदे मानते है। जबकि हमारे देश में और नगर में  पढ़े लिखे लोग भी कचरा फैलाने में पूरा योगदान देते है बिना यह सोचे कि उनके द्वारा फेंका कचरा कल कोई अनपढ़ उठाएगा ,जानते सब कुछ है पर अमल नहीं किया जाता अब आप सोचे की अगर देश की राजधानी का यह हाल है तो बाकि शहरों का क्या हाल होगा ख़ास कर रेलवे स्टेशन पर तो नाक पे रुमाल रख कर ही बैठना पड़ता है।


 बढ़े एक क़दम स्वच्छता की और 


आओ हम अपनी तरफ से पहल करें ।कूडा न फैलाएँ ...... अब “स्वच्छ भारत“को हमे ही बनाना है तो इसके लिए खुद को ,अपनी आदतों को बदलना पड़ेगा ...... नहीं मजबूरी में नहीं बल्कि सफाई को अपने स्वभाव मैं शामिल करना होगा इससे देश -शहर तो साफ़ होंगे ही बिमारीअां भी कम होंगी ।इसके लिए जरूरी है कि घर के हर मेंबर को सफाई के बारे में समझाया जाये ।कूड़ा बिलकुल भी खुले में न डाल के हमेशा डस्टबिन में ही डाला जाये और कार में या सफर में भी अपने साथ कोई लिफाफा रखना चाहिए जिसमें सारा कूडा एकत्रित करके डस्टबिन में ही डाला जाये ।गुटके व् पान की पीक के छींटे दीवारों पर बहुत बुरे लगते है साथ ही कई बीमारियों का कारण भी बनते है ,इनसे परहेज़ ही अच्छा है ।अपने बच्चो में अच्छे संस्कार डाले .....उन्हें देश की कदर करना सिखायें ।अगर देश आपका है तो इसकी ज़िम्मेदारी भी आपकी है।।  जब इस सिलसिले में अधिशासी अधिकारी हनीफ़ खान से संपर्क साधा गया तो उन्होंने फोन नही उठाया। जिससे इस समस्या को उनको अवगत नही कराया जा सका । सड़क पर कूड़ा फैलाने वाले लोगों पर लहरपुर पालिका द्वारा जुर्माना लगाना चाहिए।। जिससे सफाई की अहमियत समझाने से नही जुर्माने से समझ मे आ जाए।।

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