उर्दू शिक्षक भर्ती प्रक्रिया दोष पूर्ण पाये जाने के बाद नहीं हुई कार्यवाही

उर्दू शिक्षक भर्ती प्रक्रिया दोष पूर्ण पाये जाने के बाद नहीं हुई कार्यवाही
  • दो शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही का आदेश कर प्रशासन मौन
  • पूरी प्रक्रिया पर उठे थे सवाल, शिक्षकों के खिलाफ भी विभाग ने नहीं की कार्यवाही

ललितपुर

बेसिक शिक्षा विभाग में उर्दू भर्ती को लेकर हुये घोटाले में जाँच के बाद भी विभाग कोई कदम नहीं उठा रहा है।

जबकि जिलाप्रशासन ने दो शिक्षकों की सेवा समाप्त करने के आदेश जारी किये हैं। लेकिन आदेश के बाद शिक्षकों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही अमल में नहीं लायी, साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि जब पूरी भर्ती प्रक्रिया ही दोष पूर्ण है तो उसे रद्द करने के लिए कोई कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है।

हालाँकि उक्त प्रकरण से नवांगुत्तक जिलाधिकारी अवगत कराया गया है। माना जा रहा है इस प्रकरण शीघ्र ही कठोर कार्यवाही होने के आसार नजर आ रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि शासन के द्वारा वर्ष 1995 में उर्दू भर्ती के आदेश जारी किया गया। शासन द्वारा 124 शिक्षकों की भर्ती का आदेश जारी किया गया। जबकि तत्कालीन डाइट प्राचार्य ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर अवगत कराया कि जनपद में उर्दू शिक्षत आवेदकों की संख्या कम है।

इसके बाद जिलाधिकारी के आदेश पर जनपदस्तर पर 58 पद अनुमोदन किया गया। 5 अगस्त 1995 को विज्ञप्ति जारी किया गया। साथ ही 20 अगस्त 1995 को आवेदन लेने की अन्तिम तिथि निर्धारित की गयी। 10 सितम्बर से भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ की गयी। शासनादेशानुसार 30 सितम्बर को प्रक्रिया पूर्ण की जानी थी।

नियत तिथि तक 46 शिक्षकों की नियुक्ति की गयी। जिसमें दो शिक्षक आरक्षित वर्ग के शामिल रहे। बाकि बचे पदों को आरक्षित वर्ग के बताते हुये सुरक्षित रखने की बात कही गयी। इसके बाद वर्ष 1996 को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 6 शिक्षकों की भर्ती की गयी। इसके बाद 12 आवेदकों ने न्याय के लिए न्यायालय की शरण ली।

न्यायालय ने उक्त शिक्षकों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के आदेश दिये। इसके बाद तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी ने शासन को पत्र जारी किया कि चूँकि भर्ती प्रक्रिया को एक वर्ष से अधिक समय हो चुका है, इसलिए अब इन्हें बिना किसी नयी भर्ती के शासनादेश के बगैर शामिल नहीं जा सकता है।

शिक्षा विभाग का खेल यही समाप्त नहीं हुआ। मार्च 1997 में शिक्षा विभाग ने 6 उर्दू शिक्षकों भर्ती कर लिया। साथ ही विभिन्न शिकायतों पर शासन को गुमराह करते रहे। जब आवेदकों ने सूचना के अधिकार के तहत शिक्षा विभाग से मार्च 1997 में भर्ती के सम्बन्ध में शासनादेश की माँग की गयी तो वह ऐसा कोई आदेश नहीं दे पाये।

साथ ही वर्ष 1997 में भर्ती शिक्षकों में कई तो ऐसे थे, जिन्होंने वर्ष 1996 में इण्टर उर्दू से उत्र्तीण की, इसलिए पूर्व की भर्ती प्रक्रिया में उनका शामिल होना सिद्ध नहीं होता है। इसकी शिकायत जब जिला प्रशासन से की गयी, तो जिलाधिकारी द्वारा जाँच टीम गठित की गयी। जाँच टीम ने उक्त भर्ती प्रक्रिया को गलत पाया गया।

किन्तु इसके बाद पूरी प्रक्रिया को रद्द न करते हुये, दो शिक्षकों के खिलाफ ही कार्यवाही की गयी है। अब देखना यह है कि नवांगुत्तक जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल द्वारा इस पकरण में क्या निर्णय लिया जा सकता है।
 

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