अश्रुपूर्ण आँखों से माँ भगवती को दी विदाई...

 अश्रुपूर्ण आँखों से माँ भगवती को दी विदाई...

गाजे बाजे के साथ देर शाम तक चला मां के स्वरूप की विदाई का सिलसिला

ललितपुर -

नवरात्रि पर्व के समापन पर पिछले नौ दिनों से पूजित मां भवानी की प्रतिमाओं को गाजे बाजे के साथ ले जाने का सिलसिला देर रात्रि तक लगा रहा। उत्साहित भक्तों ने मां के जयकारे लगाते हुए नगर परिक्रमा की।

नगर में झांकी स्थलों से प्रतिमाओं को गोविंद सागर बांध विसर्जन स्थल तक पहुंचाया गया। उत्साही युवाओं ने रंग गुलाल उड़ा कर श्रद्धा का प्रदर्शन किया। भ्रमण के पश्चात विधि विधानपूर्वक इन स्वरूपों को विसर्जित कर दिया गया।

पिछले 9 दिनों से समूचा जिला दुर्गामय बना हुआ था। सुबह व सायंकालीन होने वाली आरती में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित होकर आदीशक्ति की श्रद्धा में लीन बने रहते थे। आज अधिकांश कार्यक्रमों का विधिविधान पूर्वक समापन हो गया है।

जहां सिद्ध पीठों पर पिछले 9 दिनों से श्रीमद् भागवत कथा, श्रीराम कथा, दुर्गा सप्तशती पाठ आदि के कार्यक्रम चल रहे थे वहीं झांकी स्थलों पर प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे। आज यज्ञ क्रियाओं के साथ मां भवानी के स्वरूप के समक्ष आहूतियां दी गईं।

अपरांह समय मां के दरबारों से प्रतिमाओं को वाहनों में सजा कर नगर परिक्रमा के लिए ले जाया गया। मां के स्वरूपों को आस्थावान युवक सम्भाले हुए थे वहीं नृत्य करतीं टोलियां परम्परागत गीतों पर झूमती हुई चल रहीं थीं।

पिछले नो दिनों तक जो श्रद्धालु लगातार क्रियाओं में भागीदारी जता रहे थे वह अंतिम दिन भी बड़े उत्साह के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए पवित्र सरोवरों में ले गए। अगले वरस फिर आना के साथ देवी प्रतिमाओं को विदाई दी गई।

नगर में ग्रामीण क्षेत्रों से अलग आज नजारा बिखरा हुआ था। गोविंद सागर बांध की तलहटी में आदीशक्ति की प्रतिमाओं की सामूहिक महाआरती उतारी गई। पूजन विधान की क्रियाओं के पश्चात स्वरूपों को अश्रुपूरित नेत्रों से विसर्जित कर दिया गया।

जिले में शारदीय नवरात्रि के दौरान होने वाले कार्यक्रम पहचान बने हुए हैं। इन कार्यक्रमों में धर्म, जाति जैसे संकुचित नामों के लिए कोई जगह नहीं होती।

दूसरे धर्मों के अनुयाई भी बढ़-चढ़ कर आयोजनों में भागीदारी निभाते हैं। 9 दिनों तक चलने वाले आयोजनों में उन्होंने प्रमुख रूप से योगदान दिया। झांकी स्थलों से भले ही मां के स्वरूपों की विदाई हो गयी हो लेकिन जिले का सौहार्द सदैव याद रखा जाएगा। 

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