विश्वस्तरीय महामारी- ओबेसिटी को कैसे करें दूर

विश्वस्तरीय महामारी- ओबेसिटी को कैसे करें दूर

विश्वस्तरीय महामारी- ओबेसिटी को कैसे करें दूर

मिस श्रुति शर्मा, बैरिएट्रिक काउन्सलर एवं न्यूट्रिशनिस्ट

जेपी हाॅस्पिटल, नोएडा

ओबेसिटी या मोटापा ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का वज़न इतना ज़्यादा हो जाता है कि इसका बुरा असर उसकी सेहत पर पड़ने लगता है। जब व्यक्ति अपने शरीर की ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरीज़ का सेवन करता है तो यह अतिरक्त कैलोरीज़ फैट के रूप में शरीर में जमा होने लगती हैं।

इससे शरीर का वज़न बढ़ने लगता है और व्यक्ति धीरे धीरे ओबेसिटी या मोटापे का शिकार हो जाता है। ओबेसिटी से कई तरह की बीमारियों जैसे दिल की बीमारियों, मधुमेह/ डायबिटीज़ और उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ जाती है। 

विश्व ओबेसिटी फाउन्डेशन के अनुसार भारत में 2014 में ओबेसिटी से पीड़ित लोगों की संख्या 3.7 फीसदी थी जो 2015 तक 5 फीसदी हो जाएगी। यूएस में मोटापे/ ओबेसिटी से पीड़ित सबसे ज़्यादा 13 फीसदी लोग पाए गए, इनमें बच्चे और युवा दोनों शामिल हैं। इजिप्ट इस सूची में सबसे आगे रहा, जहां मोटापे से पीड़ित मरीज़ों की संख्या 35 फीसदी है।  

निदान

ओबेसिटी का निदान मरीज़ की शारीरिक जांच एवं उसके इतिहास के आधार पर किया जाता है। मोटापे के कारण बीमारियों के संभावना की जांच के लिए व्यक्ति के बीएमआई (इवकल उंेे पदकमग ) का मापन किया जाता है। एशियाई व्यस्कों में 18.5 से 22.9 का बीएमआई तथा अमेरिकी व्यस्कों में 18.5 से 24.9 का बीएमआई स्वस्थ माना जाता है। हालांकि यह वर्गीकरण 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों, गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर लागू नहीं होता। 65 साल या अधिक उम्र के लोगों में नाॅर्मल रेंज थोड़ी अधिक होती है। 

कारण

ऽ आनुवंशिक कारणः जीन इस बात के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि आपके शरीर में कहां और कितना फैट स्टोर होगा। भोजन को उर्जा में बदलना और व्यायाम के दौरान शरीर में कैलोरीज़ का बर्न होना भी इन पर निर्भर करता है। 

ऽ जीवनशैलीः गतिहीन जीवनशैली के कारण व्यक्ति का वज़न तेज़ी से बढ़ता है। अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से निष्क्रिय है तो वज़न बढ़ने से कई बीमारियां हो सकती हैं जैसे आथ्राइटिस, दिल की बीमारियां, लिवर की बीमारियां, ब्लड प्रेशर आदि। अगर किसी व्यक्ति के माता-पिता में से एक या दोनों मोटापे का शिकार हैं तो बच्चों में मोटापे की संभावना बढ़ जाती है।

ऽ सेहतमंद आहार का सेवन न करनाः कैलोरीज़ से युक्त आहार का सेवन, जंक फूड का सेवन, ज़्यादा कैलोरी से युक्त पेय पदार्थों का सेवन करने और फलों और सब्ज़ियों का सेवन कम करने से व्यक्ति मोटापे का शिकार हो सकता है।  

ऽ उम्र- मोटापा किसी भी उम्र में, यहां तक कि छोटे बच्चों में भी हो सकता है। लेकिन आपकी उम्र बढ़ने के साथ हाॅर्मोनल बदलाव एवं गतिहीन जीवनशैली के कारण मोटापे की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा अपने शरीर में मौजूद पेशियां उम्र के साथ कम होने लगती हैं। मसल मास कम होने से मैटाबोलिज़्म की दर कम हो जाती है, इसलिए अगर व्यक्ति बिना सोचे समझे किसी भी आहार का सेवन करे और शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहे तो वज़न बढ़ने की संभावना बढ़ती है। 

ऽ बीमारियां और दवाएंः कुछ लोगों में मोटापा कई बीमारियों के कारण भी हो सकता है। कुछ दवाओं के कारण भी कई बार व्यक्ति का वज़न बढ़ जाता है। ऐसे में आपको आहार और व्यायाम पर ध्यान देना चाहिए। 

ऽ गर्भावस्था- गर्भावस्था में महिलाओं का वज़न बढ़ना अनिवार्य है। लेकिन कई बार यह बाद में मोटापे का कारण बन जाता है। 

ऽ नींद की कमी- पूरी नींद न लेने से शरीर में हाॅर्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे भूख बढ़ती है। ज़्यादा भूख लगने से आप ज़्यादा कैलोरीज़ से युक्त खाद्य पदार्थों और कार्बोहाइड्रेट का सेवन करने लगते हैं, जिससे वज़न बढ़ सकता है।

बीमारियां 

मोटापे के कारण कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं जैसेः

ऽ स्ट्रोक

ऽ कैंसर

ऽ इन्फर्टिलिटी/ प्रजनन क्षमता में कमी

ऽ दिल की बीमारियां

ऽ आॅस्टियोआथ्राइटिस

ऽ टाईप 2 डायबिटीज़

ऽ गाॅलब्लैडर/ पित्ताश्य की बीमारी 

ऽ सांस की बीमारियां

ऽ इरेक्टाईल डिस्फंक्शन

ऽ उच्च रक्तचाप

ऽ मैटाबोलिक विकार 

ऽ गायनेकोलोजिकल समस्याएं

ऽ नाॅन-एल्काॅहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़

ऽ नर्व डिसआॅर्डर जैसे वेरिकोज़ वेन्स एवं डीप वेन थ्रोम्बोसिस

ऽ ट्राईग्लीसराईड बढ़ना और एचडीएल काॅलेस्ट्राॅल कम होना 

 

 

जीवनशैली में बदलाव

ऽ नियमित रूप से व्यायाम करेंः नियमित व्यायाम के द्वारा आप अपना वज़न नियन्त्रण में रख सकते हैं। तेज़ चलना, तैरना और साइकल चलाना अच्छे व्यायाम हैं।

ऽ सेहतमंद आहार लें- दिन में तीन नियमित आहार लें। कुछ लोग भूख लगने पर किसी भी समय खाते हैं। वे बिना समय मीठे व्यंजनों और जंकफूड का सेवन करते हैं। कम कैलोरी से युक्त आहार, फल, सब्ज़ियों और साबुत अनाज का सेवन करें। मिठाईयों, एल्काॅहल का सेवन सीमित मात्रा में करें। सैचुरेटेड फैट के सेवन से बचें।

ऽ खूब पानी पीएंः पानी शरीर का वज़न सामान्य बनाए रखने में मदद करता है, यह मैटाबोलिक रेट को बढ़ाता है। पानी कैलोरी बर्न करने में मदद करता है और अगर आप खाने से पहले पानी पीएं तो आपकी भूख को शांत करता है। खीरे, नींबू, अदरक, पुदीने का रस वज़न घटाने, विशेष रूप से पेट से फैट कम करने में मददगार है। 

ऽ नियमित  रहेंः अपने वज़न को नियन्त्रित बनाए रखने केे लिए योजना बनाएं। 

 

सेहतमंद आहार जो फैट कम करने में हैं मददगार

ऽ ग्रीनटीः ग्रीनटी में एक एंटीआॅक्सीडेन्ट एपीगालोकैअेकिन गैलेट होता है जो फैट बर्न करने, खासतौर पर बैली फैट कम करने में मदद करता है। 

ऽ व्हे प्रोटीन- व्हे प्रोटीन का शेक को क्विक मील कहा जा सकता है, यह फैट कम कर शरीर का वज़न नियन्त्रित बनाए रखने में मदद करता है। 

ऽ बैरीजः बैरीज़ में पाॅलीफिनाॅल एंटीआॅक्सीडेन्ट भरपूर मात्रा में होता है, जो फैट बर्न करने में मदद करता है। यह पेशियों में खून का प्रवाह बढ़ाता है। 

ऽ नट/ मेवेः मेवों में एंटीआॅक्सीडेन्ट, प्रोटीन, फाइबर, सेहतमंद वसा भरपूर मात्रा में होते हैं जो शरी का वज़न संतुलित बनाए रखने के लिए मददगार है।

ऽ दही या योगहर्टः फुल-फैट से युक्त दही बेहद पोषक है। इसमें काॅन्जुगेटेड लिनोलिक एसिड होता है जो वज़न कम करने और फैट बर्न करने में मददगार है। 

ऽ दालेंः दालों में एमिनो एसिड बहुत अधिक होते हैं, इनमें कैलोरी और फैट की मात्रा कम होती है। इसके अलावा इनमें पानी की मात्रा अधिक होने के कारण ये फैट बर्न करने में मदद करती हैं। 

ऽ ओटः ओट में अघुलनशील फाइबर और कार्बोहाइड्रेट होता है, जो भूख को शांत करता है। फ्लेवर रहित ओट फैट बर्न करने में बेहद मददगार हैं। 

ऽ अण्डाः अण्डे में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। यह भूख को शांत कर आपको पेट भरने का अहसास देता है, फैट बर्न करता है और दिल की बीमारियों से सुरक्षित रखता है।

ऽ फैटी फिशः फैटी फिश में ओमेगो-3 फैटी एसिड होता है जो फैट बर्न करने में मददगार है। सप्ताह में कम से कम दो बार 3.5 आउंस (100 ग्राम) फैटी फिश का सेवन आपको दिल की बीमारियों से सुरक्षित रख सकता है।    

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