मिश्रिख क्षेत्र की गौशाला बन रही मौत की साला

मिश्रिख क्षेत्र की गौशाला बन रही मौत की साला

मिश्रिख क्षेत्र की गौशाला बन रही मौत की साला

संवादाता -नरेश गुप्ता

मिश्रित सीतापुर/

प्रदेश शासन की प्राथमिकताओं में शामिल गौ रक्षा हेतु शासकीय धन से ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित गौशालाये भगवान भरोसे ही चल कर संबंधित ग्राम प्रधानों की अतिरिक्त कमाई का जहां पर साधन साबित हो रही है वहीं व्यवस्था और देखरेख के अभाव में भूख प्यास से तड़प तड़प कर गोवंश मरने की आम होती खबरें लोगों के मन मस्तिष्क पर गहरा आघात पहुंचा रही हैं

जबकि प्रशासन इस ओर से मूक बना हुआ है ।प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां विकास क्षेत्र की ग्राम पंचायत गुलहरिया मे शासकीय मंशा अनुरूप ग्राम प्रधान की देखरेख में और उसी के खेत में एक गौशाला का संचालन  मजरा बहरा खेड़ा गांव के समीप में हो रहा है जहां बीती रात भूख प्यास से तड़प तड़प कर 8 गायों ने दम तोड़ दिया ग्रामीण बताते हैं कि इसके पहले भी शासकीय मंशा अनुरूप संचालित इस गौशाला में कई गोवंश भूख प्यास के चलते तड़प तड़प कर काल के गाल में समा चुके हैं

ज्ञातव्य हो कि आवारा छुट्टा घूमने वाले गोवंश से किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के वास्ते प्रदेश शासन द्वारा ग्राम प्रधानों की देखरेख में गौशालाओं के संचालन का निर्णय लिया था और इसी क्रम में प्रति गाय चारा आदि की व्यवस्था हेतु ₹30 भी निर्गत किया जा रहा है विडंबना है कि प्रधान उक्त धन को सही मद में न खर्च करके अपनी अतिरिक्त कमाई का जरिया बनाएं हुए हैं जिसका जीता जागता उदाहरण बीती रात ग्राम बहरा खेड़ा मजरा गुलहरिया में मौत के आगोश में समाई 8 गए खुलेआम प्रस्तुत कर रही है अपनी कमी को छिपाने के लिए यहां का प्रशासन इधर उधर की बातें बता कर मीडिया कर्मियों सहित अन्य लोगों को गुमराह करने में लगा हुआ है

जबकि शासन की प्राथमिकताओं में शामिल गोवंश की सुरक्षा खतरे में दिखाई दे रही है यह प्रक्रिया अकेली इस ग्राम पंचायत में ही नहीं बल्कि विकास क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों में संचालित की गई गौशालाओं की है जो भगवान भरोसे ही चल कर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है और भूख प्यास से तड़प तड़प कर गोवंश काल के गाल में समाते जा रहे हैं और प्रदेश शासन के मुखिया की मंशा पर खुलेआम हो रहा है कुठाराघात ।आखिर इसका जिम्मेदार कौन?

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