अवतारों में सर्वोपरि है श्री राम,, व्यासपीठाधीश

अवतारों में सर्वोपरि है श्री राम,, व्यासपीठाधीश

नरेश गुप्ता /देशबंधु तिवारी की रिपोर्ट

अवतारों में सर्वोपरि है श्री राम,, व्यासपीठाधीश

नैमिष मिश्रिख

नैमिषारण्य तीर्थ में पुष्टिमार्गीय वल्लभ सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित छठे ऋषि सत्र 88000 श्रीमद् भागवत पारायण महायज्ञ में आज व्यासपीठाधीश अनिल कुमार शास्त्री जी ने भागवत भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि माता पिता इस लोक में साक्षात देव तुल्य होते है उनके आदेश में अगाध श्रद्धा , उनकी निस्वार्थ सेवा आपकी जीवन की सार्थकता का सबसे सत्य बिंदु है जिसे प्रभु श्रीराम ने अपने अवतार में स्वयं 14 वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार कर जग को पुत्रधर्म की सबसे शाश्वत परिभाषा से परिचित कराया , व्यास पीठाधीश जी कहते है जिस जीव पर ईश्वर की कृपा हो जाती है उसका प्रमाण यह मिलता है कि उस जीव पर सब कृपा करने लग जाते हैं , भगवान जब स्वयं भक्त के हो जाते हैं तो संसार भक्त के नाम को मन्त्र के रूप में जपने लगता है , भगवान की कृपा से पूर्ण भक्त संसार में जीव के कल्याण और ईश्वर- नाम के संकीर्तन के प्रवाह को और तीव्र करने के लिए आते हैं , भक्त कभी भी राग, द्वेष और वैमनस्य नहीं करते , व्यास जी ने समुद्र मंथन को मन में विषयो का मंथन बताया वहीं अमृत को प्रभु की भक्ति , व्यास पीठाधीश जी ने आज भगवान श्री राम के अवतार का वर्णन करते हुए बताया कि रामावतार हमें जीवन जीना सिखाता है अर्थात रामायण और भागवत हमारे जीवन मृत्यु को सुधारती है , भगवान के जन्म के बहुत से कारण हैं , भगवान का अवतार पृथ्वीलोक के परम सौभाग्य से होता है आज भगवान सीताराम के विवाह की झांकी ने सबका मन मोह लिया वहीं कर्णप्रिय भजनों पर भक्त कई बार थिरकते दिखे आज के कथा सत्र की पूर्णता पर शाम की आरती में प्रधान भागवत यजमान राजिंदर कुमार गुप्ता , हेमा विशाल सुखानी , हरेश भाई मेहता , श्याम अटल , पुरुषोत्तम मंधन्या , हरीश चन्द्र जोशी , गिरीश चन्द्र पांडेय , आर सी अग्रवाल आदि ने आचार्यों द्वारा वैदिक मन्त्रोच्चार के मध्य श्रीमद् भागवत महाग्रन्थ व व्यास पीठ का पूजन किया इस अवसर पर व्यास पीठाधीश प्रतिनिधि रंजीत दीक्षित , राम किशोर दीक्षित , आयोजन समिति से संजीव अग्रवाल , राकेश शर्मा समेत बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे ।

Comments