महापुरुषो की संगत परिस्थिति नहीं मनिस्तिथि को भी बदल देती है, तुलसी जी महाराज 

महापुरुषो की संगत परिस्थिति नहीं मनिस्तिथि को भी बदल देती है, तुलसी जी महाराज 

नरेश गुप्ता /आनंद तिवारी की रिपोर्ट

महापुरुषो की संगत परिस्थिति नहीं मनिस्तिथि को भी बदल देती है, तुलसी जी महाराज 

नैमिष धाम मे मानव कल्याण  हेतु 108 श्री मद्भागवत विश्वनाथ पैलेस नैमिषारण्य मे चल रही, कथा व्यास तुलसी जी महाराज के मुखारविंद से भागवत रूपी गंगा मे भक्तो को गोता लगवाया, और भगवान की महिमा का गान भी किया व्यास जी ने बताया,  ईश्वर अलग सर्वव्यापी होते हुए भी अलग प्रकाशवान रहता है । इसको श्रद्धा और विश्वास से पहचाना और खोजा जा  सकता है, यह भागवत दूसरे दिन की कथा कहते हुए कथा व्यास ने कहा की यह ईश्वर प्रवचन, बुद्धि से, श्रवण से नहीं मिलता है इससे योग्यता प्राप्त होती है जिनको ईश्वर मिलना चाहता है उनको ही उस दिव्य प्रकाश की अनुभूति होती है । 
भक्ति करने वाले का कल्याण सदैव होता है लेकिन ज्ञान और वैराग्य दोनों का कल्याण बिना सत्संग के नहीं हो सकता है जब नारद जी ने भक्ति के दोनों पुत्रों को श्रीमद्भागवत रूपी वेदों का सार सुनाया तब वह तरुण हो इसलिए यह कथा जितनी बार हो सके सुननी चाहिए जिससे हर व्यक्ति अपने आप को ईश्वर की प्राप्ति में लगा सके । इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे l आयोजित108 श्रीमद् भागवत पारायण  महायज महायज संकल्पी प. रोहित कुमार शास्त्री के सानिध्य तृतीय दिवस  मे यह भागवत सभी भक्तो ने आनंद की प्राप्ति की,

Comments