गुरु कैसे करेंगें सुखी दाम्पत्य जीवन....

गुरु कैसे करेंगें सुखी दाम्पत्य जीवन....

कुंडली में शुभ गुरु से सुखी दांपत्य जीवन:

वर-वधू की कुण्डली में गुरु, सुखी दाम्पत्य जीवन के लिये पाप प्रभाव से मुक्त होना चाहिए ! गुरु की शुभ दृ्ष्टि सप्तम भाव पर हो तो वैवाहिक जीवन में परेशानियों के बाद भी अलगाव की स्थिति नहीं बनती ! अगर कुण्डली में गुरु पीडित हो तो विवाह में विलम्ब होगा ! जब गुरु पर पाप प्रभाव हो तथा गुरु पापक् ग्रह की राशि में स्थित हो तो निश्चित रुप से दाम्पत्य जीवन में अनेक प्रकार की समस्यायें आने की संभावनाएं बनती है

! विवाह के बाद सर्वप्रथम संतान का ही विचार किया जाता है ! गुरु दाम्पत्य जीवन की बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ संतान का कारक ग्रह भी है,अगर गुरु किसी पापक ग्रह के प्रभाव से दूषित हो तो संतान प्राप्ति में भी बाधाएं आती है ।

इति शुभम्

अम्बरीष चन्द्र मिश्रा अयोध्या

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