राधे राधे

राधे राधे

          लेखक मान सिंह नेगी 

 

 राधे रूपी प्रसाद सुबह और शाम लिया करो।

 जब दिल करे तब राधे रूपी प्रसाद लिया करो।

 

जबरदस्ती नही है,

प्यार से, प्रेम से राधे रूपी प्रसाद लिया करो।

 

 इस प्रसाद से मन को सुख मिलता है।

 इस प्रसाद से मन मे शांति रहती है।

 

 राधे रूपी प्रसाद मे निरन्तर आनंद है।

 

 इसीलिए कहता हूं।

 राधे रूपी प्रसाद सुबह और शाम लिया करो।

 जब दिल करें तब राधे रूपी प्रसाद लिया करो।

 

 राधे रूपी प्रसाद से होता चमत्कार है।

 ना भेदभाव ना रहता द्रेष है।

 अहंकार की नापाक तलवार को,

 काटकर 

संगम बना देता भक्त और भगवान मे।

 

 बार बार कहता हूं ।

राधे रूपी प्रसाद लिया करो सुबह और शाम

 जब दिल करे तब लिया करो।

राधे रूपी प्रसाद 

इतिश्री

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