शिक्षा ब्यवस्था पर विशेष -सपना की कलम से

शिक्षा ब्यवस्था पर विशेष -सपना की कलम से

मैथ को छोड़ दिया जाए तो कभी किसी भी सब्जेक्ट में 100 में 70 लाना भी बहुत बड़ी बात थी. मैथ हमारे लिए कम्पनसेट्री सब्जेक्ट का काम करता था ..

इसमें ज्यदा से ज्यदा मार्क लाने की कोशिश की जाती ताकि कुल मिलाकर 60 % का बरियर पार हो सके.स्टेट टोपर के पछ्हतर से अस्सी प्रतिशत के बीच मार्क आते थे.

अचानक से सब कुछ बदल गया .अब एक एवरेज बच्चे के भी सत्तर प्रतिशत मार्क आते हैं.अब हर स्कूल  के दो चार स्टूडेंट्स  के मार्क 95 पर सेंट या उससे ऊपर आते ही हैं.

मेरा पाला कई ऐसे स्टूडेंट्स से पड़ता है जो दसवी में 95 परसेंट वाले होते हैं.मिलकर ऐसा लगता है पढाई अब एग्जाम को केंद्र  में रखकर की जा रही है.पढाई का मकसद सिर्फ एग्जाम पास करना और ढेर सारे मार्क्स इकठ्ठा करना  ही लगता है. यही वजह है की ज्यदातर 95 % वालों स्टूडेंट्स को भी तीन महीने बाद चार्ल्स एंड बोय्ल्स के लॉज़ तक नही याद रहते.

एजुकेशन अब ग्रहण करने के बजाय विनिमय की विषयवस्तु होकर रह गयी है.एग्जाम दो ..तबाड़तोड़ मार्क लो ..फिर भूल जाओ क्या पढ़ा था.

लेकिन क्या हासिल होगा इससे..इस आभासी आत्मविश्वास के पेड़ पर चढ़कर ये ज्यदातर बच्चे अपना गलत मूल्याकन कर बैठेंगे....IITJEE , CAT  और UPSC तो दूर TET और बीएड के एग्जाम तक नही पास हो पाते ..फिर  सरकार को कोसा जायेगा कि सत्तर परसेंट लाने वाला लड़का अब क्या पकौड़ा तले ?

मेरा मानना है - अ टोपर इज ऑलवेज अ टोपर...marks achieved by them must be in consonance with their knowledge and wisdom.

एक बात और .अच्छा परसेंट जरुरी भी है..,मेरिट न हुई तो एडमिशन कहाँ होगा.ये एक बड़ा फैक्टर है.यहाँ पेरेंट्स एक बात और कह सकते हैं कि मार्क्स हम थोड़ी न देते हैं ...हम तो अपने बच्चो को काबिल बनाने के लिए स्कूल भेजते हैं.बात तो एकदम सही है.मतलब सिर्फ बच्चो के भविष्य के साथ ही नही बल्कि  पेरेंट्स के साथ भी चीटिंग हो रही है.

असल में अंग्रेजो द्वारा दी गयी इस शिक्षा निति को दुरुस्त और बिलकुल ही परिवर्तित करने की दरकार है...आप खुद सोचिये की इस शिक्षा निति की बजह से हम पिछले दो सौ सालों में कितने वैज्ञानिक, फिलोसोफेर , समाज सुधारक पैदा करने में समर्थ हुए ?

अगर आपके बच्चे ने हाई मार्क अचीव किये है तो खुश होने के साथ ही एक बार उसका मूल्याङ्कन जरूर करें की क्या वो इतने मार्क पाने  लायक समान्तर योग्यता रखता है ?वरना दसवी के बाद ११वी १२ वी में जाते ही  मेरे जैसी कोई टीचर चार सवाल पूछकर उसके वर्चुअल कांफिडेंस की  धज्जी उड़ा देगी...तब असलियत का सामना करना मुश्किल हो जायेगा.
@sapnagupta

 

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