गुंडा टैक्स की वसूली देख चुके नगरवासी अब गृहकर-जलकर के नाम की रंगदारी से परेशान

गुंडा टैक्स की वसूली देख चुके नगरवासी अब गृहकर-जलकर के नाम की रंगदारी से परेशान
  • गुंडा टैक्स की वसूली देख चुके नगरवासी अब गृहकर-जलकर के नाम की रंगदारी से परेशान
  • • बुनियादी सुविधाएं मयस्सर नहीं नगर-प्रशासन के लगान वसूली की चहुंओर चर्चा

(स्वतंत्र प्रभात)

सोनौली/महराजगंज

बात बुनियादी सुविधाओं की करें तो वह दूर-दूर तक मयस्सर नहीं रोटी,कपड़ा, मकान, चिकित्सा व शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं का जहां टोटा लगा हो वहां हाऊस टैक्स के नाम पर बेलगाम भारी-भरकम वसूली नगरवासियों के बीच दाद में खाज वाली उक्ति को चरितार्थ करने लगी है।

कभी नेशनल हाईवे से गुंडा टैक्स में फजीहत झेल चुका नगर-प्रशासन समय-समय पर अवैद्य वसूली के नये-नये मानकों को तय कर स्थानीय जनों से धनादोहन करता आमजन के उत्पीड़न में अभी भी हावी ही दिख रहा है। प्राप्त समाचार के अनुसार, नवगठित नगर-पंचायत को अभी अस्तित्व में आये महज़ अभी ढाई वर्ष भी नहीं हुए

जिसे इस अल्प समय में राज्य सरकार द्वारा इंडो-नेपाल सीमा का अंतर्राष्ट्रीय कस्बा होने के कारण आदर्श नगर-पंचायत भी घोषित कर दिया गया। बावजूद इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद भी भ्रष्टाचार के आकंठ में डूब चुका नगर-प्रशासन अब-तक अठखेलियां लेता ही नजर आ रहा है।

कभी प्रतिबंधित प्लास्टिक के नाम पर स्थानीय व्यावसायियों से मोटे धनादोहन की शिकायत हो या फिर ठेकेदारी के खेल में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो नेशनल हाईवे से अराजक तत्वों द्वारा गुंडा टैक्स की वसूली में बड़े माल के बंदरबांट में हिस्सेदारी की सुर्खियां हो सभी जगहों पर मौजूदगी इनकी जगजाहिर है।

ताज़ा मामला हाल-फिलहाल नगर में गृहकर व जलकर के नाम की अवैद्य वसूली का है, जिसे स्थानीय जनों की जेबों पर डाका डालने सी किसी कार्रवाई से कमतर नहीं है। इस बावत पड़ताल के दौरान स्थानीय नगर-पंचायत के बाशिंदों ने खुलकर बात की राम-जानकी नगर वार्ड के संतोष अग्रहरि, मनोज जायसवाल, सुनील गुप्ता समेत दर्जनों का कहना रहा

कि हमारे मकानों के नाम गृहकर तीन-तीन हजार से लगायत छः हजार तक बताया गया है। जबकि न तो पीने का स्वच्छ जल कस्बे में मुहैया है,और न तो चिकित्सा की कोई समुचित व्यवस्था जबकि सरकारी अस्पताल है भी तो पिछले पांच- छः वर्षों से निर्माणाधीन है।

जबकि इतने अंतराल में तो एम्स जैसे संस्थान भी बना दिए जाते। कुछ ऐसा ही कहना रहा घनश्याम नगर वार्ड निवासी रहमतुल्लाह व दिनेश का जिन्होंने अपने बातचीत में हमें बताया कि एक तो हमें भारी-भरकम वसूली हेतू कागजात थमा दिए गये और आनलाईन हमें कोई भुगतान की पावती कोई रसीद नहीं दी गई

जिससे क्षुब्ध हम लोगों ने उक्त कर ही जमा नहीं किए अलबत्ता अगले ही दिन नगर-पंचायत के कर्मियों ने हमें बताया कि जिनका भी गृहकर-जलकर अधिक है। उन्हें किस्तों में कर अदायगी की सुविधा भी नगर-प्रशासन ने दे रखी है। ऐसी पड़तालों से नगर-पंचायत की मंशा स्वत:ही समझ आ जाती है, जहां चल रहे भ्रष्टाचार के इस खेल की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

 

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