एक गाँव में आज क्या बचा है?थोड़ी सी साफ-सुथरी हवा और पानी?

एक गाँव में आज  क्या बचा है?थोड़ी सी साफ-सुथरी हवा और पानी?

स्वतंत्र प्रभात/अम्बेडकर नगर
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एक गाँव में आज भी क्या बचा है ? थोड़ी सी साफ-सुथरी हवा और पानी। लेकिन बेतरतीब तरीके से उभर रहे लोकल लेवल के नव-व्यवसायी लोग उसे भी साबुत नहीं रहने दे रहे हैं। 
मैं बात कर रहा हूँ, पोल्ट्री फॉर्म व ईंट भट्ठे जैसे व्यवसायों की, जिसको लगाते वक़्त किसी भी मानक का पालन नहीं किया जाता है, और प्रदूषण नियंत्रण विभाग आदि की एनओसी भी मिल जाती है। 

यह कहानी, जनपद अयोध्या के थाना इनायतनगर में आने वाले पड़री गाँव की है। यह गाँव एक सुदूरवर्ती इलाके में पड़ता है। यानी किसी भी हाईवे से 12 किमी. दूर। शुद्ध रूप से खेतिहर है व जंगल आदि से संपन्न गाँव है। 

कुछ साल पहले इस गाँव में एक बाहरी व्यवसायी ने 5 एकड़ के लगभग कृषि भूमि खरीदी। यह ज़मीन रज़िया खान के नाम खरीदी गई है जोकि उबैदुर्रहमान, जिला पूर्ति अधिकारी (सप्लाई विभाग) की पत्नी हैं। उसके बाद उसने उस जमीन पर बाउंड्री आदि की घेराबंदी शुरू कर दी, और प्रचारित करवाया कि स्कूल खोलेगा। गाँव वाले इससे नाराज नहीं हुए बल्कि स्वागत किया। लेकिन फिर उसने डेढ़-दो साल से वहां मुर्गी फॉर्म बनाना शुरू कर दिया।

तब से गाँव वाले छिटपुट विरोध करते रहे। लेकिन इधर कुछ महीनों से पोल्ट्री फॉर्म में उत्पादन शुरू हो गया है। उत्पादन शुरू होने से दुर्गंध काफी पैदा हो गई है जोकि सड़क से गुजर रहे लोगों, डेढ़ सौ मीटर पर ही बने प्राइमरी व जूनियर स्कूलों और पड़री गाँव को परेशान कर रही है, साथ ही मक्खियों का प्रकोप भी बढ़ गया है। 

गौरतलब है कि, पोल्ट्री फॉर्म को बनाने में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नई गाइडलाइन्स का पालन नहीं हुआ है। 
गाँव के सार्वजनिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे बीमार पड़ने लगे तो ग्रामीणों ने स्कूल पर मीडिया को बुलाकर संगठित विरोध किया जिसमें 200 से ज्यादा बड़े बूढ़े महिलाएं व बच्चे भी थे। विद्यालय बंद होने की स्थिति में मामला स्थानीय दैनिकों में भी पहुँचा, जिससे बीएसए व ब्लॉक स्तर के अधिकारियों ने संज्ञान लिया। 

गाँव वासी - वीर बहादुर सिंह, कन्हैयालाल कोरी, राजेश सिंह (पूर्व प्रधान), सियाराम और नरसिंह आदि ने हर महकमे व दर- दर तक गुहार लगाई कि पोल्ट्री फॉर्म बंद हो। लेकिन, गाँववासियों का कहना है कि बीएसए से लेकर एसडीएम-बीकापुर तक सब उसी व्यवसायी की बात मान रहे हैं, क्योंकि व्यवसायी रज़िया के पति उबैदुर्रहमान खुद ही उच्च पद पर हैं और संभवतः उन्हीं के पैसों से यह पोल्ट्री फॉर्म खुल रहा है। 

मामले में बिडंबनापूर्ण मोड़ तब आया जब व्यवसायी के कहने पर, थाना इनायतनगर ने सार्वजिनक विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ रंगदारी वसूलने के आरोप में FIR दर्ज किया। यह सोचने की बात है कि, जहाँ सैकड़ों ग्रामीण खुलकर सार्वजनिक विरोध कर रहे हैं, जहाँ व्यवसायी द्वारा खुलकर नियमों का उल्लंघन हुआ है, जहाँ बदबू व मक्खी के प्रकोप से गांववासी त्रस्त हैं, वहीं उन्हीं के खिलाफ FIR भी हो रहा है।

गौरतलब है कि जिसे रंगदारी वसूलना होगा वह  व्यक्ति सार्वजनिक विरोध का सहारा नहीं लेगा।  गांववासियों को गुप्त संकेत मिला है कि, एसडीएम (लव कुमार सिंह) व्यवसायी के पक्ष में हैं, और उन्हीं के प्रभाव से ग्रामवासियों को डराने के लिए FIR करवाया गया है। 
लेकिन ग्रामवासी डरने वाले नहीं हैं, क्योंकि यह उनके रोजमर्रा के जीवन का सवाल है। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, की गाइडलाइन्स :-
【नोटिस संख्या : बी-4032/पीसीआई-एसएसआई/पॉल्ट्री/2015-13165】

#पोल्ट्री फार्म : 
◆आवासीय क्षेत्र से 500 मीटर दूर होना चाहिए। 
◆बड़े जल क्षेत्र जैसे-झील, नहर आदि से 200 मीटर दूर होना चाहिए । 
◆किसी बड़े जल भरण क्षेत्र से 500 मीटर दूर होना चाहिए । 
◆किसी कुएँ, जल भंडारण टैंक आदि से 100 मीटर दूर होना चाहिए। 
◆नेशनल हाइवे से 150 मीटर दूर होना चाहिए । 
◆स्टेट हाइवे से 100 मीटर दूर होना चाहिए। 
◆गाँव की सड़क व पगडंडी आदि से 10-15 मीटर दूर होना चाहिए । 

गौरतलब है कि यह पोल्ट्री फॉर्म पूर्वोत्तर तरफ पड़री व पश्चिमोत्तर तरफ चेतरा गांव से दूरी का मानक पूरा नहीं करता है। और प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूल विद्यालय इस फार्म से 150 मीटर की दूरी पर ही हैं। 

स्थानीय सांसद, विधायक से मिलने व मदद पाने के सभी प्रयास बेमानी साबित हो रहे हैं। और मुख्यमंत्री, उत्तरप्रदेश के तमाम ऑनलाइन पोर्टल्स, व शिकायत निवारक टूल्स का उपयोग भी कमतर साबित हो रहा है। गांववासियों ने लगभग 500 हस्ताक्षर करके भी जनपद स्तर के अधिकारियों को भेजा।

लेकिन लोकल लेवल पर एसडीएम के प्रभाव व व्यवसायी के पैसे पॉवर व पॉलिटिक्स के मैनेजमेंट के चलते गांववासियों को हतोत्साहित करने की लगातार कोशिश हो रही है। 

व्यवसायी द्वारा जिन 8 लोगों के खिलाफ रंगदारी वसूलने की तहरीर दर्ज हुई है वे इस प्रकार है :   
वीर बहादुर सिंह, राजेश सिंह (पूर्व प्रधान), कन्हैयालाल कोरी, सियाराम कोरी, केशवराम कोरी, राकेश, सौरभ आदि। 

कितनी विचित्र बात है कि, पब्लिक प्लेस पर विरोध कर रहे लोगों पर रंगदारी के भी आरोप लगते हैं और पुलिस तहरीर दर्ज कर लेती है, जबकि जेनुइन मामले में यही पुलिस कितना हीला-हवाली करती है, किसी से छुपा नहीं है। गाँव वासियों ने न तो उस पोल्ट्री फॉर्म को अभी कोई हानि पहुंचाई है और न ही कोई उपद्रव किया है। 

लेकिन एसडीएम लव कुमार सिंह व व्यवसायी के साँठगाँठ की बात लोगों की जुबान पर है। 
लोग अपनी हवा, अपना पानी, अपनी श्वांस तक नहीं बचा सकते क्योंकि पॉवर और पैसे का गंठजोड़ बहुत बड़ा है। 

कृषि जीवन बिताने वाला यह गाँव विचित्र किस्म की हालत का शिकार हो गया है। न्याय विलाप कर रहा है, पैसे वाला ललकार रहा है और व्यवस्था पावर व पैसे वाले के समर्थन में है--कहा भी गया है कि, "समरथ को नही दोष गुसाईं"..

काश, प्रदेश की सरकार मामले का संज्ञान ले।

 

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