विद्यावाचस्पति सारस्वत सम्मान से सम्मानित हुए सुरेन्द्र सिंह ‘झंझट’

विद्यावाचस्पति सारस्वत सम्मान से सम्मानित हुए सुरेन्द्र सिंह ‘झंझट’

स्वतंत्र प्रभात-रवींद्र कुमार 

 

गोण्डा

बीएसएनएल में हिन्दी अनुवादक के पद पर कार्यरत जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार सुरेन्द्र बहादुर सिंह ‘झंझट’ को दीर्घकालीन साहित्य सेवा के क्षेत्र में योगदान करने के लिए  विहार के भागलपुर स्थित विक्रम शिला हिन्दी विद्यापीठ (विश्वविद्यालय)  ने विद्यावाचस्पति की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। विद्यापीठ की ओर से यह सारस्वत सम्मान उन्हें गाँधी सेवाग्राम वर्धा, महाराष्ट्र में आयोजित 23वें अधिवेशन में प्रदान किया गया। कुलाधिपति सुमन भाई मानस भूषण,कुलपति डॉ तेज नारायण कुशवाहा व कुलसचिव डॉ देवेन्द्र नाथ शाह द्वारा भव्य समारोह में देश विदेश से आए साहित्यकारों व विद्वानों के बीच झंझट को यह विद्यावाचस्पति सारस्वत सम्मान एवं स्मृति चिन्ह  उन्हें हिन्दी की दीर्घकालीन साहित्य सेवा व देश  में कविता के प्रचार प्रसार व हिन्दी व्यंग्य को नई दिशा देने के साथ ही अनुसंधान  के लिए प्रदान किया गया है।

 

      जनपद में हास्य व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर कवि ‘झंझट’ ने बताया कि कवि -सम्मेलन के  मंचों पर उनकी लोकप्रियता हास्य-व्यंग्य की बदौलत मिली है, इसलिए लोग उन्हें मूल रूप से हास्य व्यंग्य का  कवि मानते हैं। वैसे उन्होंने  गीत , लोकगीत, छंद नवगीत, मुक्तक व गजलों के साथ बाल कविताओं की भी रचना की है। लोकगीत  की भाषा जहाँ अवधी रही है वहीं अन्य विधाओं में खड़ी बोली का ही प्रयोग किया है।  07 फरवरी 1961 को जनपद के पसका वराह क्षेत्र में ग्राम तेलहा पूरे राजा चौहान में एक किसान परिवार में जन्में श्री ‘झंझट’ सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि लेने के बाद संप्रति जनपद के भारत दूर संचार में हिन्दी अनुवादक के पद पर कार्यरत हैं। 

साहित्य सेवा का जुनून छात्र जीवन से रहा है। जनपद के वयोवृद्ध कवि हीरा सिंह ‘मधुर’  के मार्गदर्शन में काव्य रचना की यात्रा शुरू हुई तो नौकरी के दौरान बलरामपुर में तैनाती काल में पद्यश्री बेकल उत्साही के संरक्षण में देश के अनेक प्रदेशों में भ्रमण के दौरान हास्य- व्यंग्यकार के रूप में  एक नई पहिचान मिली। उनके व्यंग्य में सीधे सादे सरल व गँवई मुहावरों से समाज के सामन्ती और भ्रष्ट व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। आकाशवाणी और दूरदर्शन से भी कई कविताएं प्रसारित हो चुकी हैं।  उनका 'बिल्ली का संन्यास' बाल कविता संग्रह प्रकाशित होकर लोकप्रियता का नए आयाम  दिया है, वहीं ‘निकले तीर कमान से’ नामक हास्य-व्यंग कविता संग्रह, ‘पागल मनवा गाए रे’ गीत लोकगीत, ‘जीत कहूं या हार जिन्दगी’ गजल व बिखरे आखर’ नाम से छन्द मुक्तक संग्रह प्रकाशनाधीन है। कवि के रूप में  विद्वानों से मिली सीख व कवि सम्मेलन में उनके खट्टे मीठे अनुभवों पर आधारित संस्मरण भी  गद्य में शीघ्र प्रकाशित होने वाला है।

  सुरेन्द्र सिंह ‘झंझट’ को विद्या वाचस्पति सम्मान मिलने पर जनपद के साहित्यकार डा0 सूर्यपाल सिंह, एसपी मिश्र, शिवाकांत मिश्र ‘विद्रोही’, डा0 उमा सिंह, हरी राम शुक्ल ‘’प्रजागर’ , विनय अक्षत, यज्ञराम मिश्र ‘यज्ञेश’, ज्योतिमा शुक्ला आदि  कवियों दी बधाई।

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