शिक्षकों की लड़ाई संगठन पूरी क्षमता के साथ इमानदारी से लड़ेगी

शिक्षकों की लड़ाई संगठन पूरी क्षमता के साथ इमानदारी से लड़ेगी

शिक्षकों की लड़ाई संगठन पूरी क्षमता के साथ इमानदारी से लड़ेगी

सिकन्दरपुर बलिया  माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा उत्तर प्रदेश के जिलाध्यक्ष डॉक्टर कृष्ण मोहन यादव ने रविवार की शाम वित्तविहीन विद्यालयों के अध्यापकों से मिलने के बाद चतुर्भुज नाथ इंटर कॉलेज पर पत्र प्रतिनिधियों से वार्ता के दौरान बताया कि वित्तविहीन शिक्षकों की लड़ाई संगठन पूरी क्षमता के साथ इमानदारी से लड़ रहा है

देश में जिसको सबसे अधिक सम्मान मिलना चहिए आज वह सबसे अधिक उपेक्षित है। बिना शिक्षकों की कृपा के देश में राष्ट्रपति तो दूर की बात है कोई चपरासी भी नहीं बन सकता है। मतलब देश के एक चपरासी से लेकर महामहिम राष्ट्रपति तक सब अपने शिक्षकों के एहसान को भूल चुके हैं। लगता है कि देश की बागडोर एहसानफरामोशों के हाथ में है इसीलिए शिक्षकों का हर कदम पर अपमान हो रहा है।

जिस शिक्षक को सम्मानजनक वेतन नहीं मिलता है वह शिक्षक अपने कपड़े खरीदने से लेकर धुलाने प्रेस करवाने की भी व्यवस्था के लिए मोहताज है। वित्तविहीन विद्यालयों में हालत यह है कि 10 माह का वेतन दिया जाता है, अर्थात साल के 2 महीने शिक्षक या तो जाकर कहीं पल्लेदारी करें या फिर भूंखा मरे। धन्य हैं देश के नीति नियन्ता। और धन्य है आपकी कृतघ्नता।। 
 

विगत दिनों माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत वित्तविहीन शिक्षकों कर्मचारियों के मानदेय की मांग को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ना होने पर प्रधानमंत्री कार्यालय में 7 जनवरी को जंतर मंतर दिल्ली के मैदान में शिक्षकों के समूह ने मिलकर मांग पत्र सौंपा है। बताया की लगभग 21000 माध्यमिक विद्यालयों में 30 लाख वोट प्रभावित करने की क्षमता वित्तविहीन शिक्षक रखते हैं।

जिसका मत प्रतिशत दो प्रतिशत से भी अधिक है।  उत्तर प्रदेश सरकार मामले को संज्ञान में नहीं ले रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा की धारा 7 क (क) को 7(4) में परिवर्तित कराते हुए इन्हें पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा दिलाने एवं सेवा सुरक्षा आयुक्त नियमावली बनाने के साथ ही समान कार्य का समान वेतन उपलब्ध ना होने की दशा में जीविकोपार्जन हेतु सम्मानजनक मानदेय सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाए।  इसके लिए संगठन लगातार प्रयास कर रहा है।  

वह दिन दूर नहीं है संगठन की मांगों को कोई भी सरकार अनसुना नहीं कर सकती है बस जरूरत है संगठित होने की शिक्षकों से संगठन का विस्तार करते रहने की अपील किया। इस दौरान सौरभ कुमार मिश्र शारदा पांडे लालबचन तिवारी सुनील शर्मा सर्वजीत डॉ राकेश पाण्डेय आदि मौजूद थे।

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