अवैध तरीके से झारखंड की बालू बंगाल की ओर तस्करी, राजस्व का भारी नुकसान

 
अवैध तरीके से झारखंड की बालू बंगाल की ओर तस्करी, राजस्व का भारी नुकसान

पाकुड़िया /पाकुड़ /झारखंड:- 

अवैध तरीके से बालू झारखंड की राजस्व पर हो रही नुकसान मामला पाकुड़ जिला के अंतर्गत पाकुरिया प्रखंड की है पकड़िया प्रखंड के अंतर्गत बड़ासिंहपुर पंचायत बड़ा सिंहपुर बाबू झुट्टी बेनकुंदा गांव से झारखंड की राजस्व बंगाल की और बालू की तस्करी क्या जा रहा है। ब्राह्मणी नदी झारखंड के राजस्व बालों की तस्करी लेकर अब तक सरकार अनजान क्यों है स्थानीय लोगों जानकारी के मुताबिक बाबू झूट्टी, बड़ा सिंहपुर हर दिन बालू की तस्करी लूट हो रही है।

इस तक प्रशासन एवं सरकार की अब तक नजरबंद पड़ी हुई है स्थानीय लोगों की जानकारी अनुसार बताया जा रहा है सैकड़ों ट्रैक्टर दिन-रात बालू की तस्करी में लगे रहते है इसको लेकर आवाज उठाते है तो हमारे हमारे साथ मारने के लिए जुट जाते हैं जानकारी के अनुसार यहां के लोगों भय के कारण आवाज नहीं उठा पाते हैं। इसको लेकर गंभीरता का विषय है बड़ा सिंहपुर पंचायत गानपुरा पंचायत को लेकर बालू को तस्करी 300 करोड़ राजस्व का नुकसान हो रही है।

इसको लेकर सरकार की अगले कदम क्या हो सकती है सालों से बालों बालू की तस्करी एवं लूट हो रही सरकार क्यों दे दी गई है छूट क्या सरकार इसमें मिले हुए हैं नदी, पहाड़ और खनिज वाला झारखंड. जल, जंगल जमीन वाला झारखंड. संस्कृति, परंपरा और विरासत की बात करने वाले झारखंड में कई चीजों की लूट की सरकार ने खुली छूट दे रखी है.जिन्हें जमीन लूटना है, वो जमीन लूट रहे हैं और जिन्हें यहां की खनिज संपदा लूटनी है, वो उसकी लूट में जुटे हैं।

 झारखंड सरकार के वक्त से ही बालू एक बड़ा चर्चा का विषय रहा है झारखंड में. जो सरकार झारखंड संस्कृति खनिज संपदा की बात करती है वह अभी झारखंड की जल जंगल बालू की तस्करी हो रही झारखंड की राजस्व 300 करोड़ चुना लगाया जा रहा है। लेकिन वहां का ग्रामीणों का अवस्था देखकर जर्जर रोड को विकास अब तक नहीं हो पाती लेकिन अवैध तरीकों से लूट हो रही सरकार के खजाने को प्रशासन और सरकार मौन क्यों है?

बालू माफिया बुलंदी लेकर बंगाल के और ले जाया जा रहा ट्रैक्टरों की संख्या बढ़ी तादाद है लेकिन अब तक स्थानीय प्रशासन, जिला प्रशासन की जानकारी प्राप्त क्यों नहीं हो पाती झारखंड को विकास को लेकर बात करने वाले सरकार आज तक इस विषय में संज्ञान क्यों नहीं ली।
 

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