भारत देश के भाल पर सजी हुई बिंदी हूँ भारत की बेटी हूँ आपकी अपनी हिंदी हूँ गरिमा व शालिनी

 
भारत देश के भाल पर सजी हुई बिंदी हूँ, भारत की बेटी हूँ आपकी अपनी हिंदी हूँ  गरिमा व शालिनी

स्वतंत्र प्रभात 


 

बाँसगांव - गोरखपुर । बाँसगांव क्षेत्र के भैसहीं बुजुर्ग में स्थित शिवालिक पब्लिक स्कूल में हिंदी दिवस के अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य अतीश कुमार , उप प्रधानाचार्य बीना पाण्डेय व समस्त शिक्षकगणों के नेतृत्व में हिंदी दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया । जिसमें छात्र व छात्राओं ने हिंदी दिवस के अवसर पर प्रतिभाग लिया , और स्पीच भी दिए। तथा धूमधाम से हिंदी दिवस मनाया ।

   वहीं प्रधानाचार्य श्री कन्नौजिया ने अपने सम्बोधन में बताया कि देशभर में 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। य‍ह दिन हिंदी भाषा की महत्‍वता और उसकी नितांत आवश्‍यकता को याद दिलाता है। हिंदी दुनिया में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। सिर्फ भारत ही नहीं, हिंदी बोलने और लिखने वाले लोग इस वक्त फिजी से लेकर नेपाल और दक्षिण अफ्रीका तक मिल जाएंगे। सन 1949 में 14 सितंबर के दिन ही हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला था जिसके बाद से अब तक हर साल यह दिन ‘हिंदी दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है।

      आखिरी जनगणना के डाटा को आधार बनाएं तो देश में करीब 43.63 फीसदी जनता की पहली भाषा हिंदी पाई गई। यानी आज से 10 साल पहले देश के 125 करोड़ लोगों में से लगभग 53 करोड़ लोग हिंदी को ही मातृभाषा मानते थे। साल 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो देश के सामने एक राजभाषा के चुनाव को लेकर सबसे बड़ा सवाल था। भारत हमेशा से विविधताओं का देश रहा है, यहां सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती है। राष्ट्रभाषा के रूप में किस भाषा को चुना जाए ये बड़ा प्रश्‍न था। काफी विचार के बाद हिंदी और अंग्रेजी को नए राष्ट्र की भाषा चुन लिया गया। संविधान सभा ने देवनागरी लिपी में लिखी हिन्दी को अंग्रजों के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया।

   राजभाषा के दर्ज में अंग्रेजी को हटाकर हिंदी को चुने जाने पर देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रर्दशन शुरू हो गया था। तमिलनाडु में जनवरी 1965 में भाषा विवाद को लेकर दंगे भी छिड़ गए थे। साल 1918 में महात्मा गांधी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था। गांधी जी ने ही हिंदी को जनमानस की भाषा भी कहा था। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया था कि हिंदी भारत की राजभाषा होगी।

 कार्यक्रम में मुख्य रूप से उप प्रधानाचार्य बीना पाण्डेय , सरोज यादव , तनुजा राय, सुमन राय , किरन राय, अखिलेश कुमार , संदीप यादव , सुनील यादव, अनुराधा राय , डेजी राय, समस्त शिक्षकगण व समस्त छात्र - छात्राएं भी उपस्थित रहे ।

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