खुले में शौच जाने की पंरपरा को तोड़ रही सुमित्रा

-गांव को ओडीएफ बनाने की मुहिम को दे रहीं पंख

 
खुले में शौच जाने की पंरपरा को तोड़ रही सुमित्रा

-100 से ज्यादा ग्रामीणों ने छोड़ी खुले में शौच 

-कबरई के डिगरिया गांव में चला रहीं सामुदायिक शौचालय 

महोबा । ब्यूरो रिपोर्ट-अनूप सिंह

गांवों में खुले में शौच जाने की परंपरा का अंत और ग्रामीणों को तमाम बीमारियों से बचाने के लिए कबरई ब्लाक के डिगरिया गांव की सुमित्रा ने पहल की है। गांव-गांव घूमकर सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित कर रही है। जिसका नतीजा है कि 100 से ज्यादा लोगों ने खुले में शौच न जाने की शपथ ली।

केंद्र सरकार द्वारा गांवों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाने की दिशा में लगातार प्रयास चल रहा है। ग्रामीणों को घरों में शौचालय बनाने और इसके लिए उपयोग के लिए योजना चलाई जा रही है। सुमित्रा इस मुहिम को पंख दे रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सहयोग से गांव में दो साल से सामुदायिक शौचालय चला रही हैं। सुमित्रा बताती हैं कि शुरूआत में इक्का-दुक्का लोग ही आते थे। फिर उन्होंने गांव में जाकर महिलाओं और किशोरियों को प्रेरित करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि खुले में शौच से न सिर्फ बीमारियों बल्कि अनहोनी घटनाओं का भी खतरा रहता है। 

उन्होंने बताया कि डुग्गी के माध्यम से खुले में शौच करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होने की बात कही। ताकि लोगों के मन में भय पैदा हो और वह खुले में शौच करना बंद कर दें। शुरूआत में लोग उसकी बातों को सुनना भी पसंद नहीं करते थे। लेकिन वह लगातार कोशिश करती रहीं। सुमित्रा की मुहिम रंग लाई और कुछ महिलाएं व किशोरियां उसकी मुहिम से जुड़कर सामुदायिक शौचालय आने लगीं। मौजूदा समय में 35 महिलाएं व किशोरियों सहित 100 से ज्यादा ग्रामीण रोजाना शौचालय का उपयोग करने लगे। सुमित्रा का कहना है कि गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने तक वह प्रयास करती रहेंगी। 

एनआरएलएम में जिला मिशन मैनेजर प्रीति पूजा चौरसिया ने बताया कि गांव को ओडीएफ बनाने में सुमित्रा बेहतर प्रयास कर रही हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने इस काम की शुरुआत की। इससे उन्हें समुदाय में एक नई पहचान मिली है। 

मुख्यमंत्री ने मिला सम्मान 

दो साल पहले सुमित्रा ने गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने की मुहिम शुरु की। गांव को ओडीएफ बनाने दिशा में उनके प्रयास बेहद सराहनीय रहे। गांव में लोगों को सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल करने के प्रति जागरूक किया। उनके इन्हीं प्रयासों को देखते हुए पिछले साल मुख्यमंत्री योग आदित्य नाथ ने उन्हें सम्मानित भी किया।

   

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