बैंक में पैसे निकालने आए बीमार बुजुर्ग की मौत मचा हड़कंप

 
बैंक में पैसे निकालने आए बीमार बुजुर्ग की मौत मचा हड़कंप

मृतक के बेटे का गंभीर आरोप ढाई घंटे उलझाए रहें बैंक कर्मी सदमे से मौत

रामसनेही घाट बाराबंकी।

बीमार बुजुर्ग अपने बेटे के सहारे के साथ बैंक ऑफ इंडिया शाखा भीखरपुर में ईलाज खातिर रूपया निकालने आया बुजुर्ग बैंक की तिलिस्मी कार्रवाई में ऐसा उलझाया गया कि पैसे तों नहीं निकले लेकिन प्राण जरूर निकल गये।

पूरा मामला कोतवाली असंद्रा क्षेत्र के देवीगंज चौराहे पर स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा भीखरपुर का हैं। जहा पर बुधवार की दोपहर में क्षेत्र के मानपुर मकोहिया निवासी सत्तर वर्षीय बुजुर्ग छेदी पुत्र गुरूदीन तबीयत होने पर इलाज कराने खातिर रूपया निकालने अपने बेटे अंबिका के साथ शाखा आया था। 

मृतक के बेटे का गंभीर आरोप ढाई घंटे उलझाए रहें बैंक कर्मी सदमे से मौत

जहा पर बैंक के गेट के पास बुजुर्ग पिता को बैठाकर बैंक कर्मियों से पैसे निकालने की गुहार लगाता रहा लेकिन बैंक कर्मी अपनी नियमित कार्यशैली और व्यवहार के सापेक्ष ही कार्य करते रहे और हस्ताक्षर न मिलान होने की बात कहते रहें। और अंततः पैसे तो नहीं निकले लेकिन प्राण जरूर निकल गये। जिससे हड़कंप मच गया। सूचना पाकर मौके पर पुलिस भी पहुंची लेकिन मृतक छेदी के पैतालीस वर्षीय पुत्र अंबिका पिता के शव को ई रिक्शा से घर लेकर चले गए 

मृतक बुजुर्ग के बेटे अंबिका के अनुसार पैसे नहीं निकलने से सदमे से हुई मौत

  मृतक छेदी के पैतालीस वर्षीय पुत्र अंबिका ने बताया कि मेरे पिता बीमार थे जिनके ईलाज खातिर पैसों की आवश्यकता थी पिता के बचत खाते में पैसा जमा था जिसको निकालने के लिए पिता को लेकर बैंक आया था बैंक कर्मियों से काफी मिन्नतें की लेकिन बैंक कर्मी कागजी कार्रवाई में ढाई घंटे लगा दिए जिसके सदमे से से मेरे पिता की मौत हो गई।

बैंक की हीलाहवाली बुजुर्ग की मौत का कारण

मृतक छेदी के पैतालीस वर्षीय पुत्र अंबिका ने बताया कि मेरे पिता बुजुर्ग हो गये थे जिससे हस्ताक्षर बनाने में परेशानी होती थी अंगूठे के लिए साल भर से फरियाद कर रहे थे कि अंगूठा सिस्टम कर दो लेकिन बैंक कर्मी दौड़ाते रहें। जिससे आज पैसे मिलने में देरी हुई और सदमे में पिता की मौत हो गई। अंबिका ने यह भी बताया कि आज जब जल्दी की बात की तो बैंक कर्मियों ने फटकार भी लगाई।

भाईयों के शहर से आने पर होगा अंतिम संस्कार

भाईयों के शहर से आने पर होगा अंतिम संस्कार

मृतक छेदी के पुत्र अंबिका ने बताया कि अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई मेरे भाई शहर में रहते हैं उनके आने पर ही शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा पिता की मौत की सूचना पाकर शहर में कमाने गये मृतक छेदी के पुत्र घर के लिए रवाना हो गए हैं।

बोले बैंक मैनेजर

जब हमारे संवाददाता ने बैंक ऑफ इंडिया शाखा भीखरपुर के मैनेजर से उक्त प्रकरण में बात की गई तो मैनेजर ने बताया कि बुजुर्ग पहले से ही काफी ज्यादा बीमार थे उनकी मौत का बैंक का कोई लेना देना नहीं है। और दो घंटे तक लेट लतीफी की बात का खंडन किया है।

शाखा की कार्यशैली पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल स्थिति बद से बद्तर

बैंक ऑफ इंडिया शाखा भीखरपुर में पहले भी गंभीर आरोप लगते रहे हैं कभी आम जनता को परेशान करने के आरोप तों कभी जनता को दौड़ाने की बात सामने आती रही है करीब एक वर्ष पूर्व क्षेत्र के ही एक खाता धारक की बैंक परिसर में मृत्यु हो गई थी लेकिन मामले में लीपापोती कर दी गई थी। बैंक ऑफ इंडिया शाखा भीखरपुर में बैंक कर्मियों के आस पास ग्राहक से ज्यादा बैंक मित्र मंडराते रहते हैं 

जबकि बैंक मित्र को निर्धारित स्थानों पर बैठ कर जनता को सर्विस देनी चाहिए लेकिन शाखा प्रबंधक की हीलाहवाली या सीधे तौर पर कहें तो मिलीभगत से बैंक मित्र बैंक में बने रहते हैं जिसकी पुष्टि बैंक में लगे सीसीटीवी फुटेज से की जा सकती है लेकिन अपने कमाऊं पूत को कौन गाडफादर भगाना चाहेगा। बैंक में बायोमेट्रिक व्यवस्था के लिए न जाने कितने खाता धारक चक्कर काटते रहते हैं जिससे एइप्स से पैसे निकाल सके लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात जैसा है। आम जनता में बैंक ऑफ इंडिया शाखा भीखरपुर की कार्यशैली से काफी नाराजगी और आक्रोश झलक रहा है।

   

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