मुख्तार अंसारी ने जेल में तलाशी के नाम पर अपमानित करने का लगाया आरोप

कोर्ट ने गृह सचिव से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
 
मुख्तार अंसारी ने जेल में तलाशी के नाम पर अपमानित करने का लगाया आरोप

बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी के 22 साल पुराने धोखाधड़ी के मामले में विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए नीरज गौतम की अदालत में मंगलवार को सुनवाई हुई। मुख्तार की ओर से बांदा जेल से चार माह की सीसीटीवी फुटेज व जेल रजिस्टर तलब एवं जेल में अपनी जान का खतरा जताते हुए प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर दोनों तरफ से बहस हुई। एडीजीसी ने विरोध किया।

 अदालत ने उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव गृह को निर्देशित किया कि 22 सितंबर व 12 अक्तूबर के प्रार्थना पत्रों के प्रकाश में आवश्यक कार्रवाई किया जाना सुनिश्चित करें। कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराएं। वहीं मामले में कोई गवाह मंगलवार को उपस्थित नहीं हुआ। कोर्ट ने गवाहों को समन जारी करने के आदेश दिए। साथ ही एसएसपी आगरा को गवाहों की उपस्थित 22 अक्तूबर को सुनिश्चित कराने के लिए आदेशित किया।

तत्कालीन डीएम समेत दस की होनी है गवाही

तत्कालीन जिलाधिकारी आरके तिवारी इस समय प्रदेश के मुख्य सचिव हैं। घटना के समय वह आगरा के जिलाधिकारी थे। उन्हें समेत दस गवाहों की गवाही होनी है। इसमें तत्कालीन एसएसपी सुबेश कुमार सिंह, एसपी सिटी डीसी मिश्रा, मुख्य चिकित्साधिकारी एके सक्सेना, थानाध्यक्ष शिवशंकर शुक्ला, उपनिरीक्षक रुपेंद्र गौड़ आदि की गवाही होनी है। एडीजीसी शशि शर्मा ने बताया कि तत्कालीन थानाध्यक्ष शिवशंकर शुक्ला व उपनिरीक्षक रूपेंद्र गौड़ के समन भेजे जा रहे हैं।
धोखाधड़ी की धारा में तय हुए थे आरोप

अदालत ने आठ अक्तूबर को विधायक मुख्तार अंसारी पर धारा 419 (किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से मोबाइल की सिम लेना ) व 420 धोखाधड़ी के तहत आरोप तए किए थे। वहीं किसी और धारा में आरोप नहीं माने थे।


मोबाइल व बुलट प्रूफ जैकेट हुई थी बरामद

बता दें कि विधायक मुख्तार अंसारी वर्ष 1999 में सेंट्रल जेल आगरा में बंद थे। 18 मार्च 1999 को तत्कालीन जिलाधिकारी आरके तिवारी और एसएसपी सुबेश कुमार सिंह ने निरीक्षण के दौरान उनकी बैरक की तलाशी ली थी। जिसमें मोबाइल और बुलट प्रूफ जैकेट मिली थी। थाना जगदीशपुरा के तत्कालीन एसओ शिवशंकर शुक्ला ने थाने में मुख्तार अंसारी के विरुद्ध धोखाधड़ी एवं आपराधिक साजिश समेत अन्य आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें पुलिस द्वारा अंसारी के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई थी। वहीं पूर्व में मुख्तार द्वारा प्रस्तुत उन्मोचन प्रार्थना पत्र खारिज हो चुका है।


मुख्तार अंसारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. रवि अरोरा ने मंगलवार को अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इसमें कहा कि आठ अक्तूबर 2021 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान पुलिस अधीक्षक बांदा एवं कई व्यक्तियों के साथ तलाशी लिए जाने तथा अभियुक्त का अपमान किए जाने एवं प्रशासन का कोई अधिकारी मौजूद नहीं होने के संबंध में कथन किया था। वहीं इससे पहले 22 सितंबर को प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में अभियुक्त द्वारा उसकी समुचित सुरक्षा एवं चार माह के सीसीटीवी फुटेज को तलब करने का आग्रह किया था।

इस पर दोनों ओर से अधिवक्ताओं की बहस हुई। अभियोजन की ओर से एडीजीसी शशि शर्मा ने प्रार्थना पत्र का मौखिक रूप से विरोध किया। विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए नीरज गौतम ने प्रमुख सचिव गृह को निर्देशित किया कि प्रार्थना पत्रों के प्रकाश में आवश्यक कार्रवाई किया जाना सुनिश्चित करें। वहीं अदालत ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आगरा को आदेश दिया कि गवाहों पर प्रोसेस का तामीला सुनिश्चित करने के लिए अधीनस्थों को निर्देशित करें। पत्रावली 22 अक्तूबर को गवाही के लिए पेश हो।


 

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