बाराबंकी के पानी मे ज़ालिमों नाफरमान समाज के गद्दारो के बंबू करने की फितरत का असर,

अब आएगा इंडस्ट्री के रूप में नज़र बाराबंकी के सतरिख में लगेगी यूपी की पहली बंबू फैक्ट्री

 
स्वतंत्र प्रभात


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बाराबंकी:ज़िले के पानी का असर ऐसा है कि ज़ालिमों नाफरमान,समाज के गद्दारो को बर्दाश्त नही कर पाता उसके कृत्य को बंबू करने (ज़ोरदार विरोध ) करने से नही हिचकिचाता, फितरत का असर का नया रूप अब आएगा इंडस्ट्री के रूप में नज़र,बाराबंकी के सतरिख में लग रही हूं यूपी की पहली बंबू फैक्ट्री,जो अब रोज़गार से भी जोड़ेंगी और यहाँ के मिजाज़ को भी पीढ़ियों तक कायम करने में कामयाब होगी।

हरख ब्लाक के सिकंदरपुर निवासी सुनील कुमार बांस की फैक्ट्री लगाने जा रहे हैं। इसके पीछे उनकी मंशा क्षेत्र के लोगों को रोजगार मुहैया कराकर पलायन रोकना और जिले को बांस के कारोबार का हब बनाना है। वह वर्ष 2020 में बांस के उत्पाद बनाने की करीब 25 लाख लागत से एक इकाई भी स्थापित कर चुके हैं। अब करीब ढाई करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसे ग्रामोद्योग विभाग ने मंजूरी के लिए शासन को भेजा है। सरकार ने हाल ही में बांस को प्लांट से ग्रास में घोषित कर दिया है। अब बांस के उत्पाद का व्यापार करने में टैक्स नहीं लगेगा।

काम की तलाश में निकले ले आए  पैगाम 

सुनील के पिता किसान माता प्रसाद किसान थे और माली हालत भी बढि़या नहीं थी। बेटे की लगन को देखते हुए उन्होंने कर्ज लेकर उनकी पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 2011 में कुमारगंज कृषि विश्वविद्यालय से कृषि में स्नातक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के बाद वह प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने लगे। इसी बीच 2018 में इनके पिता का निधन हो गया। घर की जिम्मेदारी संग काम की तलाश में देहरादून पहुंचे।

यहां फारेस्ट रिसर्च सेंटर की प्रोफेसर डा. अंशू श्रीवास्तव ने उन्हें बंबू इंडस्ट्री लगाने का सुझाव दिया, जिस पर सुनील ने वहीं पर बांस के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया। वहां से लौटने के बाद बांस के उत्पाद बनाने की फैक्ट्री डाल दी। सुनील कुमार ने बताया कि अभी उनकी छोटी यूनिट है। इसमें मोबाइल स्टैंड, स्पीकर स्टैंड, सोफा, कुर्सी, मेज, डाइनिग सेट,सीलिुंग, थारू हाट, बैठका, रूम, वाल स्ट्रेक्चर आदि बनाए जा रहे हैं। बंबू के फार्म हाउस बनाने के लिए अयोध्या, लखनऊ, रायबरेली, हरदोई से मांग आई है।

चार एकड़ में बनेगी इंडस्ट्री 

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी वीके श्रीवास्तव ने बताया कि तीन एकड़ में बांस की खेती होगी और एक एकड़ में इकाई लगेगी। स्फूर्ति योजना के तहत करीब ढाई करोड़ की लागत से स्थापित होने वाली इस इंडस्ट्री से करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। प्रोजेक्ट को मंजूरी के लिए शासन को भेजा जा चुका है।

बांस की खेती को मिलेगा बढ़ावा :

डीएफओ एनके सिंह ने बताया कि बांस की खेती करने पर अनुदान दिया जाता है, लेकिन यहां बांस का बाजार नहीं हैं। बंबू इंडस्ट्री लगने के बाद किसानों को एक बड़ा बाजार मिल जाएगा, जिससे बांस की खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। असम व त्रिपुरा से बांस के नौ प्रकार के प्रजाति मंगाए गए हैं। विभाग की ओर से भी सुनील को इंडस्ट्री के लिए अनुदान दिया जाएगा।

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