विदेशी मानसिकता को पसंद इंडिया नाम हो प्रतिबंधित: संदीप त्यागी रसम

Anand Vedanti Tripathi
स्वतंत्र प्रभात
अनेकों राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन के साथ मिलकर समाज राष्ट्र संस्कृति के लिए कार्यरत अधिवक्ता संदीप त्यागी रसम का कहना है कि भारत के लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष दोनों का महत्व है भारत में विपक्षी दलों का गठबंधन जिसका नया नाम भी विदेशी भाषा में ही रखा गया है जोकि यूपीए से बदल कर अब बड़ा विस्तृत नाम इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लुसिव अलायन्स रख दिया गया है इस नाम का विस्तार निश्चित रूप से इसलिए ही किया गया है कि वह संक्षेप में इंडिया कहा लिखा व बोला जा सके
कोई भी गठबंधन चाहे उसमें कितनी ही संख्या में दल हो वह राष्ट्र नहीं हो सकता राष्ट्र का नाम अपने लिए प्रयोग करने का अधिकार किसी दल संगठन या संस्था को नहीं है मैं संदीप त्यागी रसम मीडिया के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति जी सहित भारत सरकार से मांग करता हूं कि दूषित विदेशी मानसिकता द्वारा दिया गया नाम इंडिया न सिर्फ संविधान से बाहर किया जाये बल्कि इसके प्रयोग पर भी रोक लगाई जाए जब तक संवैधानिक रूप से भारत के इस नाम को संविधान से हटाया नहीं जाता है तब तक इसके किसी भी तरह से किसी भी संगठन को राष्ट्र के लिए सम्बोधन में प्रयोग किए जाने वाले इस इंडिया नाम का प्रयोग नहीं करने देना चाहिए चाहे उस संगठन में कितना ही महान और महत्वपूर्ण व्यक्ति क्यों न जुड़ा हो
अगर शासन प्रशासन समुचित कदम न उठाए तो न्यायालय को स्वत संज्ञान लेना चाहिए
स्वतंत्र भारत के इतिहास में हम सबने इस दूषित निरंकुश तानाशाही मानसिकता को पहले भी देखा है
कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष देवकांत बरुआ ने इंदिरा इज इंडिया का दम्भपूर्ण वाक्य प्रयोग इसका उदाहरण है
इंदिरा इज इंडिया का उस समय पर भरपूर प्रचार प्रसार करने का काम किया गया
यह *तिलस्मी मानसिकता कुछ एक परिवार के अलावा भारत के सभी नागरिकों को दोयम दर्जे पर रखकर देखने की अभ्यस्त* प्रतीत होती है
जिसने एक बार फिर *सोची समझी रणनीति के साथ स्वयं को इंडिया अर्थात राष्ट्र कहने का दुस्साहस* किया है इसको किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता है भारत की स्वाभिमानी जनता को इसका जवाब देना चाहिए
इसी प्रकार राष्ट्रध्वज का भी प्रयोग कोई संगठन राजनीतिक दल द्वारा अपने राजनीतिक आयोजन में करते हैं जोकि
नहीं किया जाना चाहिए
गणतंत्र दिवस पर घर-घर तिरंगा अभियान के तहत पूरे देश में सभी घरों पर राष्ट्रध्वज फहराया गया और शासन प्रशासन और समाजसेवी संगठनों द्वारा अनेक बार अपील करने के बावजूद कई स्थानों पर जगहों पर घरों के ऊपर आज भी राष्ट्रध्वज विकृत रंगों के साथ लहरा रहा है
जिन जनप्रतिनिधियों व राजनीतिक दलों ने अपने राजनीतिक दलों के गठबंधन का नाम इंडिया रखने का फैसला किया है संभवतः वह भावनाओं में बहते हुए राष्ट्र प्रेम और राजनीतिक नाम को एक साथ मिला बैठे हैं इसकी न सिर्फ आलोचना होनी चाहिए अपितु उन सभी राजनीतिक व्यक्ति और व्यक्तित्वों से संदीप त्यागी रसम का निवेदन है कि राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार का नाम रखकर स्वयं को सवालों के घेरे में लाने का काम नहीं किया जाना चाहिए इसमें कुछ संशोधन कर इस नाम को परिवर्तित करें
वैसे भी इंडिया नाम ईस्ट इंडिया कंपनी सहित न सिर्फ गुलामी की याद दिलाता है अपितु हमारे अपने पूर्वजों के गुलाम बनने की टीस को बढ़ाता है
गुलामी के समय हुए अत्याचारो के ज़ख्मों को ताजा करता सा लगता है
इंडिया नाम विदेशियों द्वारा दिया गया सम्बोधन है इससे प्यार क्यों किया जाना चाहिए इस मानसिकता ने ही महान भारत को खोजकर उसका नामकरण इंडिया किया है यह धूर्त मानसिकता एक तरफ सिकंदर को विश्व विजेता बनाने के लिए उसकी भारत पर विजय दिखाती है तो दूसरी तरफ कोलंबस से उसी भारत की खोज कराती है जिसको सिकंदर ने जीता जबकि ज्ञात तथ्य आज के भारत में सिकंदर के प्रवेश भी न करने की गवाही देते नजर आते हैं
कहीं यह विदेशी ताकतों का कठपुतली मुखौटा संगठन तो नहीं बन बैठे हैं ?
मैं संदीप त्यागी रसम निवेदन करना चाहता हूं अगर यह राजनीतिक दल और नेता जन सामान्य की इन भावनाओं पर इन अपील पर गौर न करें तो इसी संदर्भ में जागरूक जनता मतदाताओं से संदीप त्यागी रसम करबद्ध निवेदन करता हूं कि राष्ट्र के मान सम्मान को बचाने बनाए रखने और आगे बढ़ाने के लिए इस प्रकार की हरकत करने वाले राजनीतिक दलों का चुनाव में बहिष्कार करें और इनके इस दुस्साहस पर सही से सबक सिखाएं न सिर्फ इनके बहिष्कार की आवश्यकता है अपितु इंडिया शब्द को ही भारत के संविधान से बाहर निकाल कर प्रतिबंधित किया जाना चाहिए..।
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