चार सालों से कागजों पर कटाया जा रहा था पेड़, ग्रामीण के घर गिरा

तहसील के गांव बुद्धा पुरवा में पास में स्थित सरकारी विद्यालय में लगा था पेड़ ग्रामीण को थी घर पर गिरने की संभावना 
 
चार सालों से कागजों पर कटाया जा रहा था पेड़, ग्रामीण के घर गिरा 

स्वतंत्र प्रभात 

पलियाकलां-खीरी सरकारी विद्यालय की बाउंड्री में लगा एक विशालकाय वृक्ष के घर पर गिरने की संभावना को लेकर ग्रामीण पिछले 4 सालों से पेड़ को हटवाने के लिए अधिकारियों के लगातार चक्कर लगा रहा था लेकिन कागजों पर अधिकारी पेड़ कटवाने के आदेश देते रहे लेकिन धरातल पर वह ग्रामीण की समस्या का समाधान नहीं कर सके। जिसके चलते बीते दिनों तेज आंधी के साथ हो रही बारिश में पेड़ ग्रामीण के कच्चे घर पर गिर गया। पेड़ गिरने से एक बच्चा व महिला छुटपुट घायल हो गई जबकि ग्रामीण का घर पूरी तरह जमींदोज हो गया। पीड़ित ग्रामीण में हुए नुकसान के मुआवजा की मांग की है। खास बात तो यह है कि दुर्घटना के बावजूद अभी भी कोई भी अधिकारी कर्मचारी पीड़ित के घर झांकने नहीं पहुंचा है।

पलिया तहसील के गांव बुद्धा पुरवा में केशन पुत्र श्री पुतान का छप्परनुमा मकान स्थित था। मकान के पीछे स्थित सरकारी विद्यालय में एक विशालकाय आम का वृक्ष खड़ा हुआ था। जिसके गिरने की संभावना को लेकर पीड़ित लगातार अधिकारियों से गुहार लगा रहा था। इतना ही नहीं पीड़ित ने विभिन्न अधिकारियों को एप्लीकेशन देकर हटवाने की मांग की और अधिकारी उक्त एप्लीकेशन पर पेड़ा हटवाने के कार्य में जुटे रहे। पीड़ित के मुताबिक 2018 से वह लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहा था अधिकारी उसे कागजों पर पेड़ हटवाने का आश्वासन तो दे रहे थे लेकिन धरातल पर किसी ने उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं किया। पीड़ित ग्रामीण केशन के मुताबिक 15 और 16 सितंबर को तेज आंधी के साथ लगातार हुई बारिश में आखिरकार वह पेड़ ग्रामीण के घर पर गिर गया। पेड़ जब ग्रामीण के घर गिरा तो वहां पर उसकी

पत्नी व एक बच्ची आग ताप रही थी जो कि छुटपुट घायल हो गई। पीड़ित के मुताबिक वह पेड़ गिरने की संभावना को लेकर लगातार अधिकारियों के दर दर पर पहुंचकर अपनी फरियाद रख रहा था। लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और आखिरकार पेड़ के घर पर गिरने से उसका भारी नुकसान हो गया। पीड़ित के मुताबिक पेड़ गिरने के बावजूद अभी तक कोई भी अधिकारी और कर्मचारी उसके घर हाल लेने नहीं पहुंचा है पीड़ित ने प्रशासन से हुए मुआवजे की मांग की है। पीड़ित का आरोप था कि अधिकारियों ने विद्यालय की प्रधानाचार्य को जल्द से जल्द पेड़ हटवाने के लिए कई बार लिखा। लेकिन विद्यालय की शिक्षिका स्कूल ही नहीं पहुंचती हैं। पीड़ित का आरोप है कि शिक्षिका साल में एक या दो बार स्कूल आती है और पूरा रजिस्टर भर कर चली जाती हैं। स्कूल में नाही बच्चों के लिए भोजन बनता है और ना ही सरकार के द्वारा दिए जाने वाले अन्य लाभ दिए जाते हैं।

   

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