अटरिया क्षेत्र में हुआ 108 कुंडीय महायज्ञ एवं संत सम्मेलन का सुभारम्भ

अटरिया क्षेत्र में हुआ 108 कुंडीय महायज्ञ एवं संत सम्मेलन का सुभारम्भ

अटरिया क्षेत्र में हुआ 108 कुंडीय महायज्ञ एवं संत सम्मेलन का सुभारम्भ

 

 जिला संवाददाता नरेश  गुप्ता की रिपोर्ट

अटरिया सीतापुर इलाके के कसिमापुर में चल रही पांच दिवसीय 108श्री कुंडीय महायज्ञ एवं संत सम्मेलन के तीसरे दिन पर कथा व्यास द्वारिका प्रसाद यादव ने कृष्ण जन्म कथा  का श्राद्धलुओ शरपान कराया।
कथा व्यास ने कहा कि द्वापर युग में पृथ्वी पर राक्षसो के अत्याचार बढने लगे पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपनी कथा सुनाने के लिए तथा उद्धार  के लिए ब्रह्मा जी के पास गई।  पृथ्वी पर पाप कर्म बहुत बढ़ गए यह देखकर   सभी देवता भी बहुत चिंतित थे ।

ब्रह्मा जी  सब देवताओ को साथ लेकर पृथ्वी को  भगवान विष्णु के पास क्षीर सागर ले गए। उस समय भगवान विष्णु अन्नत शैया पर शयन कर रहे थे। स्तुति करने पर भगवान की निद्रा भंग हो गई भगवान ने ब्रह्मा जी एवं सब देवताओ को देखकर उनके आने का कारण पूछा तो पृथ्वी बोली-भगवान मैं पाप के बोझ से दबी जा रही हूँ।

मेरा उद्धार किजिए। यह सुनकर भगवान  विष्णु उन्हें आश्वस्त करते हुए बोले - “चिंता न करें, मैं नर-अवतार लेकर पृथ्वी पर आऊंगा और इसे पापों से मुक्ति प्रदान करूंगा। मेरे अवतार लेने से पहले कश्यप मुनि मथुरा के यदुकुल में जन्म लेकर वसुदेव नाम से प्रसिद्ध होंगे। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु कृष्ण जन्म कथा में भावविभोर हुए।
 

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