भाई-बहन के उठे जनाजे तो काजीसराय से लेकर रामनगर तक सिसक उठा

भाई-बहन के उठे जनाजे तो काजीसराय से लेकर रामनगर तक सिसक उठा

भाई-बहन के उठे जनाजे तो काजीसराय से लेकर रामनगर तक सिसक उठा पाली, हरदोई । शाहजहांपुर में कार हादसे के शिकार हुए भाई-बहन के शव पोस्टमार्टम के बाद जब पाली पहुंचे, तो काजीसराय से लेकर रामनगर तक सिसक रहा था।

दोनों घरों पर पास पड़ोसियों के अलावा शुभचिंतको और रिश्तेदारों की भीड़ जमा थी। हर कोई इन मौतों से व्यथित दिख रहा था। सुबह एक घंटे के अंतराल पर भाई-बहन के शव को कब्रिस्तान में सुपुर्दे ख़ाक कर दिए गए।

आपको बताते चलें कि पाली नगर के मोहल्ला काजीसराय उत्तरी निवासी अनवार खां पुत्र हाजी इस्लाम खां और उनकी विवाहिता बहन मोहल्ला रामनगर निवासी शगुप्ता पत्नी माशूक की सोमवार को एक कार दुर्घटना में शाहजहांपुर जाते समय मौत हो गई थी। अनवार अपनी बहन को दवा दिलवाने कार से जा रहे थे, कि अचानक कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराकर खाई में पलट गई थी। जब यह दुखद खबर पाली पहुंचीं तो समूचा नगर शोक में डूब गया था।

सभी इस हादसे पर दुखी थे। देर रात दोनों भाई-बहन के शव पोस्टमार्टम के बाद पाली आ गए थे। जो गमगीन माहौल काजीसराय के हाजी इस्लाम खां के घर में था कमोबेश वहीं नजारा तकरीबन आधा किलोमीटर दूर रामनगर में माशूक के घर का भी था। विलाप करती महिलाओं का करुण क्रंदन वहां मौजूद लोगों की आंखों को नम कर रहा था। दर्दनाक हादसे का शिकार हुए मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने के लिए पास-पड़ोसियों के अलावा रिश्तेदारों और शुभचिंतको की भीड़ लगी थी।

आखिरकार वह घड़ी भी आ गई जब उन्हें सुपुर्दे ख़ाक किया जाना था। मलिक माशूक और हाजी इस्लाम खां कर घरों से जब अलग अलग समय पर जनाजें उठे तो परिजनों की चीखों से लोगों के कलेजे भी रो उठे। मंगलवार को सुबह नमाजे जनाजा के उपरांत पहले शगुप्ता और फिर उनके भाई अनवार खां के शव को कब्रिस्तान में मुस्लिम समुदाय की मौजूदगी में सुपुर्दे ख़ाक कर दिए गए। इनसेट..... किसी के सिर से अम्मी का तो किसी के सिर से उठा अब्बू का साया पाली, हरदोई । इलाहम, इकरा, जिकरा और उमामा के सिर से अब अब्बू का साया हमेशा के लिए उठ गया हैं। उनके अब्बू उन्हें छोड़कर अल्लाह को प्यारे हो गए हैं। अब इन बच्चों को कभी भी अब्बू की डांट सुनने को नहीं मिलेगी।

आने वाली ईद अब अब्बू के बगैर ही मनानी पड़ेगी। यही हाल शगुप्ता के बेटों के भी हैं। दोनों बेटों को अम्मी के प्यार और डांट से अब हमेशा के लिए महरूम होना पड़ेगा। इन बच्चों को अब अम्मी के हाथ की सेबाइयां कभी नसीब नहीं होंगी। इनसेट..... काश ! शगुप्ता नेमान ली होती पति की बात पाली, हरदोई । शगुप्ता की शाहजहांपुर से दवा चल रही थी। लेकिन रमजान शुरू होने के बाद शगुप्ता रोजे रखने लगी। सोमवार को भी वह रोजे से थी। जब शगुप्ता शाहजहांपुर जाने की तैयारी कर रही थी

तो पति माशूक ने जाने को मना किया। लेकिन शगुप्ता ने कहा कि जब भाई जा रहे हैं तो वह भी साथ चली जायेगी, और दवा लेकर लौट आएगी। अगर पति के कहने पर शगुप्ता रुक जाती तो शायद वह अपने बच्चों के बीच होती। लेकिन लौटने का वायदा करके गई शगुप्ता तो नहीं लौटी, लौटा तो सिर्फ उसका शव।

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