इस पर क्या कहना है रामपुर वायरल हुआ पोस्ट

इस पर क्या कहना है रामपुर वायरल हुआ पोस्ट

इस पर क्या कहना है रामपुर।

 रामपुर।

बात पिछली सपा सरकार की है, एक बेहद ठिठुरन भरी सर्द रात में अचानक पुलिस ने घोसियान, सराय गेट पर यतीमख़ाने को चारों तरफ़ से घेर लिया और इलाक़े की बिजली बंद कर दी गई। 


सरकारी फरमान पर पुलिस ने पहले उस इलाक़ों में रहने वाले मर्दों को उठा कर बन्द किया, फिर मासूम बच्चों को उठा उठा कर फेंकना शुरू किया, बूटों से मारा, सरकारी बसों में ठूँस दिया, हर तरफ़ रोते बिलखते, गिरते भागते बच्चों का शोर, अपने बच्चों को बचाती पुलिस से रहम की भीख माँगती बेजान हो चुकी माएँ और दूर कुछ नज़रे चुराए, डरे और घबराये खड़े खुशामद करते मर्द। 


सबके ज़ुबान पर एक ही सवाल था हमे क्यों हमारे घर से निकाल रहे हो, लेकिन किसी का दिल नही पसीजा था।
यतीमख़ाने की जगह रात में ही ख़ाली करा ली गई और रातो रात बुलडोज़र चला दिया गया। देखते ही देखते 70 सालों से आबाद बस्ती खंडहर में तब्दील हो चुकी थी।


अगली सुबह मासूम बच्चे अपने मलवे में तब्दील घर को देख रहे थे और सुबकती बेटियाँ अपनी धूल में सनी खेलने वाली गुड़ियों को ढूंढ रही थी।


शहर ख़ामोश, इंसाफ पसंद खामोश, आलिमे दीन खामोश, जामा मस्जिद कमेटी भी खामोश।
ये किसी शहर के दंगे का ज़िक्र नही बल्कि शहरे रामपुर में सपा सरकार में ही हुआ था।
सबकी खामोशी देखकर टिमटिमाता चाँद भी हैरान था और अपनी रोशनी मंद करता गया और सितारे तो जैसे ख़ामोश होकर खो गये थे।

यहां के लोग तब भी नहीं समझते इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी की एक जनता के द्वारा चूना गया नेता बोलता है मुझे चूटीयालो का वोट नहीं चाहिए फिर भी कुछ लोग उसके लिए जिंदाबाद के नारे लगाते है अल्ल्लाह खेर करे शायद वो नहीं मानते हो चूटीयाल खुद को ।।

जितने के बाद फिर वही नेता बोलता है मेने किसी से वोट नहीं मांगा फिर भी जनता उसको वोट देती है 


जमीनें हड़पना मकानों को तोड़ना कारोबार खत्म करना जैसे जूल्म फिर भी जनता वोट देती है इसका मतलब यह है साफ की क्षेत्र को बार बार मुस्लिम बहुमुल होने के कारण उनको ये समझाया जाता है की भाजपा का समर्थन मत करना बस ।।

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