फूड विभाग के अधिकारी और कर्मचारी है मस्त, इनके सह पर खुलेआम बाजारों में बिक रहा है मौत का सामान

जनता के स्वास्थ्य से इनका कोई सरोकार नहीं कमीशन की मलाई काटने में है मस्त
 
फूड विभाग के अधिकारी और कर्मचारी है मस्त, इनके सह पर खुलेआम बाजारों में बिक रहा है मौत का सामान

स्वतंत्र प्रभात-
 

गोरखपुर  के फूड विभाग की सह पर आम जनता को परोसे जा रहे है केमिकल युक्त सामन खाने पीने की व्योस्थाओ लेकर है। ज्यादा तर लोग कैंसर जैसी विमारी का शिकार हो रहे हैं ऐसे में भ्रष्ट अधिकारी मालामाल हो रहे हैं।

 जनपद गोरखपुर  में जिला फूड विभाग आये दिन माला माल हो रहा है इस समय सहजनवा बाजार में मिलावट युक्त सामानों का बोल बाला है, और अधिकारी अपने ही जनपद के लोगों को केमिकल युक्त सामानों को ब्रिक्री करवाकर उनके जिन्दिगियो से खिलवाड़ करने का काम कर रहे हैं । जिले की जिम्मेदार अधिकारी जो की जिला अधिकारी कृष्णा करुणेश है वह अपने में ही मस्त है। जनता भाड में जाये इनसे मतलब नहीं है आप सब को ज्ञात होगा की सहजनवा बाजार और उसके अगल बगल के बाजारों में   केमिकल युक्त चीजों से पनीर फाड़कर बेचा जाता हैं , और उससे महिने का मोटी रकम का कमीशन तैय है  जिले में  राजस्थान , झांसी, भिंड और भी कई क्षेत्रों से बाहरी लोगों ने पानी पुरी फालूदा बर्गर चाऊमीन और तो और पश्चिमी बंगाल से बंगाली बंधुओं ने मिलावटी मिठाई की दुकानें खोलकर जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर फूड विभाग के कर्मचारियों का और अपना जेब 

गर्म करने में लगे हुए हैं। भोली भाली ग्रामीण जनता के स्वास्थ से इनका कोई लेना देना नहीं।आपको राजस्थान  के नम्बर की कई गाड़ियां जिले के कई बाजार और दूरदराज ग्रामीण इलाके में फालूदा और ठंडाई बेचते नजर आएंगे।  जिनका कमीशन एक लाख प्रतिमाह है ऐसे ही कितने लोग और कितने खाने के सामान है जो की नियमतः गुणवत्ता में सही नहीं है और आज कल लोग आटो फिशियल हो या खाने वाली जहरीली सामान बहोत तेजी से खा रहे हैं। ऐसे में इन जिम्मेदार अधिकारियों को आखिर कौन लगाम लगाए उत्तर प्रदेश सरकार के मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का  गृह जनपद का यह मामला है ।  गोरखपुर  में अगर आप को समय हो तो थोड़ा सोचिए की आखिर उन गरीब ने क्या अपराध किया है जो पैसा भी दे रहा है और मौत का सामान भी ले रहा है मित्रों अंग्रेजो से ज्यादा कुशासन अगर कोई है तो फूड विभाग के लापरवाह और गैर जिम्मेदार अधिकारी है जो लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर माला माल हो रहे हैं। फूड  महकमे के मेहरबानी से सिर्फ कागजों में ही की जाती है इनकी जांच।

   

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