भारतीय संस्कृति में बसंत पंचमी का पर्व अपनी अलग पहचान रखता है बसंत पंचमी के पर्व को ऋषि पंचमी के नाम से भी जाना जाता है

भारतीय संस्कृति में बसंत पंचमी का पर्व अपनी अलग पहचान रखता है बसंत पंचमी के पर्व को ऋषि पंचमी के नाम से भी जाना जाता है

विश्व देव राठौर 
स्वतंत्र प्रभात
बरेली/सनातन धर्म में बसंत पंचमी का पर्व अपना विशेष महत्व रखता है इस पर्व पर ज्ञान की माता सरस्वती का जन्म हुआ था इसी दिन हिंदी साहित्य के बड़े-बड़े विद्वानों ने भी जन्म लिया जिसमें सबसे सर्वश्रेष्ठ साहित्यकार एवं कवि सूर्यकांत त्रिपाठी का भी जन्म हुआ था इसी दिन राजा भोज का भी जन्म हुआ था जिसे भारत के इतिहास में निर्भीक और न्यायकारी राजा माना जाता है बसंत पंचमी के पर्व वाले दिन ही गुरु गोविंद सिंह के दोनों बेटों को दीवारों में चुनवाया गया पौराणिक शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की उत्पत्ति की परंतु जब इस भूमि पर जन्मे प्राणियों को कुछ भी आभास ना हुआ।
 
तो उन्होंने भगवान विष्णु से अनुमति लेकर पृथ्वी पर जल छिड़का जिसके कारण पृथ्वी में कपन शुरू हो गई और इसी के मध्य एक चतुर्भुजी स्त्री प्रगति हुई जिनके एक हाथ में वीणा दूसरे हाथ में वर मुद्रा अन्य में पुस्तक और माला थी ब्रह्मा जी ने जब इसे वीणा वादन का अनुरोध किया वीणा की ध्वनि सुनते ही पृथ्वी पर जन्म में सभी प्राणियों को ज्ञान का बोध हो गया इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर पीला भोज देते हैं बसंत पंचमी का दूसरा नाम ऋषि पंचमी भी कहते हैं क्योंकि इस दिन अनेकों ऋषियों ने भी पृथ्वी पर जन्म लिया जिम राजा भोज सूर्यकांत त्रिपाठी जैसे उच्च कोटि के विद्वान परंपरा के अनुसार छ ऋतुओं में विभाजन हुआ है।
 
जिसमें ग्रीष्म ऋतु वर्षा ऋतु शरद ऋतु हेमंत ऋतु शिविर है परंतु बसंत रितु को सब ऋतुओं का राजा भी माना जाता है इसी दिन मां सरस्वती प्रगति हुई थी इसलिए इस पर्व को सनातन धर्म में बड़े ही गौरव और सम्मान के साथ मनाया जाता है इसलिए इस ज्ञान पंचमी भी कहते हैं भारतीय संस्कृति में बसंत पंचमी का पर्व सबसे गौरवशील एवं ज्ञान का पर्व है इस दिन लोग अपने घरों में हवन पूजन कर मां सरस्वती की आराधना कर उनसे ज्ञान बल बुद्धि आदि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं इसीलिए विद्यालयों में घरों में मां सरस्वती की पूजा की जाती है यह पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है जिसे इस बार भी श्रद्धा से मनाया जा रहा है

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