निगोहाँ में रोडवेज बसों के न रुकने से नाराज जागरूक ग्रामीणों का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूटा

निगोहाँ से रोजाना सैकड़ो की तादात में राजधानी जाते है दैनिक यात्री

 
निगोहाँ से रोजाना सैकड़ो की तादात में राजधानी जाते है दैनिक यात्री

स्वतंत्र प्रभात-


निगोहाँ/ लखनऊ-

निगोहाँ कस्बे में रोडवेज बसे न रुकने से नाराज लोग अपना गुस्सा सोशल मीडिया पर जाहिर कर विरोध जता रहे है।दैनिक यात्रियों का आरोप है कि रोजाना सुबह यहाँ से लखनऊ जाने के लिये सैकड़ो की संख्या में यात्री आते है।पर रोडवेज बसों के चालक बसे रोकते ही नही जबर्दस्ती करने पर जो रोकते है उनमें गैलरी तक भरी रहती है।इस विरोध को देखते हुए एक संस्था के कुछ लोगो ने सोशल मीडिया के साथ लिखित शिकायत जिम्मेदारों से करने की बात कही है।

निगोहाँ के दैनिक यात्री राजेश,आशीष राम कुमार, सुनील बताते है कि निगोहाँ कस्बे से आसपास के करीब एक दर्जनों गांवों के सैकड़ो की तादात में दैनिक यात्री सुबह आकर सड़क किनारे खड़े हो जाते जिनमे छात्र-छात्राए भी शामिल रहती है।दैनिक यात्रियों का आरोप है कि रोजाना अधिकतर लोग आपने संस्थान व कालेज पहुचने में देरी हो जाती है।इसकी मुख्य वजह है कि रायबरेली लालगंज की तरफ से आने वाली रोडवेज बसे कस्बे में रोकते नही है।जब कभी दैनिक यात्री परेशान होकर बीच सड़क पर खड़े होकर बसे रोकने के लिये खड़े हो जाते है तो जो बसे रुक जाती है।उनमें गैलरी तक कि सवारियां भरी रहती है। इसको लेकर कुछ जागरूक लोगो ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाकर विरोध शुरू किया तो उनके समर्थन में सैकड़ो लोग ने जुड़कर विरोध शुरू कर दिया।

निगोहाँ तक बसे चलवाने की मांग-------

दैनिक यात्रियों ने मांग की है कि जो बसे दुबग्गा से चलकर मोहनलालगंज तक आती है उन्हें बढाकर निगोहाँ तक कर दिया जाए।ताकि कुछ दैनिक यात्री अपने गंतव्य स्थान तक समय पर पहुच सके।

सभी बसों को रोकने के निर्देश दिए जाएं------

सोशल मीडिया पर विरोध करने वाले लोगो ने कहाकि प्रयागराज से चलकर जो बसे लखनऊ जाती है उन सभी बसों को जिम्मेदार निर्देशित करे कि निगोहाँ में सुबह शाम के समय स्टाफ किया जाए।

नेताओ को भी लताड़ा-------

सोशल मीडिया पर विरोध करने वालो ने स्थानीय नेताओं से लेकर शीर्ष नेताओं को भी जमकर लताड़ा विरोध करने वालो ने कहा चुनाव के समय ये नेता लोग तो बड़े बड़े वादे करते है।पर चुनाव खत्म होते ही सारे वादे भूल जाते है।और फिर पलटकर इलाके की समस्याओं पर ध्यान नही देते है।

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