जेई विद्युत का अमानवीय चेहरा आया सामने मुंह मांगी रिश्वत न देने पर नौकरी से निकाला
संविदा कर्मी का परिवार भुखमरी की कगार पर 22 वर्षों की नौकरी में कभी कोई गलती शिकायत ना होने की कही गई बात

स्वतंत्र प्रभात-
लखीमपुर खीरी- मामला विद्युत विभाग के मझगई फिडर का है यहां विगत 22 वर्षों से कार्यसंलग्न संविदा लाइनमैन धर्मेंद्र कुमार पुत्र शारदा प्रसाद को विद्युत जेई द्वारा बेकार बेवजह बगैर कोई नोटिस 4 माह का वेतन पिछला दिए बगैर नौकरी से निकाल दिए जाने से परिवार एक-एक रोटी को तबाह दिखाई पड़ रहा है
जेई के इस अमानवीय तानाशाह रवैया नियम विपरीत कार्य कृत्य से लोगों में भी भारी आक्रोश व्याप्त है अपने साथ हुए उत्पीड़न की कहानी पीड़ित धर्मेंद्र ने एसडीओ विद्युत अधिशासी अभियंता को लिखित शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई पर उसकी बात किसी ने सुनना पसंद नहीं किया आला अफसरों को दिए गए प्रार्थना पत्र में पीड़ित ने कहा कि वह विगत 22 वर्षों से नौकरी करता चला आ रहा है कभी कोई शिकायत अथवा लापरवाही नहीं की और नाहीं कोई कार्यवाही उसके विरुद्ध हुई है वह मझगई फीडर पर बतौर संविदा लाइनमैन कार्य करता आ रहा है उसके पास एक बिस्वा जमीन नहीं है और अपने परिवार का एकमात्र पालन पोषण करने वाला है
उसकी एक पुत्री शादी योग्य है उसके पास इस नौकरी के अलावा जीविका का दूसरा और कोई साधन नहीं है इससे पूर्व पीड़ित विभाग में सेवा करते चोटिल भी हो चुका है परंतु कार्य संलग्न रहा और ईमानदारी से अपना कार्य करता चला आ रहा है परंतु जब से जेई विद्युत शैलेंद्र सिंह ने चार्ज संभाला तबसे उत्पीड़न करना शुरू कर दिया पीड़ित संविदा ने बताया नवंबर में पूरा महीना काम करने के बाद भी 10 दिन का वेतन दिया गया उसके बाद माह दिसंबर जनवरी फरवरी का वेतन भी नहीं दिया गया जब संविदा कर्मी द्वारा अपना वेतन मांगा तो उससे पहले ₹20000 की मांग की, कि आप को निकाल दिया गया है
सभी लड़कों की तरह तुम भी सुविधा शुल्क दो तो वेतन भी मिल जाएगा और नौकरी पर रख लिया जाएगा और उसके बाद अधिक धन की मांग की जाने लगी पीडित द्वारा असमर्थता बताने पर बिना कारण बताए और बगैर नोटिस दिए पावर हाउस में घुसने ना देने का आदेश अन्य मातहतों को देकर नौकरी से निकाल दिया गया क्या है नियम और कानून जब भी किसी कर्मचारी के ऊपर कोई आरोप लगता है तो सबसे पहले उसे स्पष्टीकरण मांगा जाता है जिसमें वह अपनी सफाई पेश करता है उसके बाद किसी भी संविदा कर्मी को कार्यमुक्त किया जाता है तो 1 माह पूर्व नोटिस दी जाती है और 1 माह का वेतन देने के बाद कार्यमुक्त किया जाता है
तथा कार्य मुक्त करने का पर्याप्त साक्ष्य आधारित कारण बताया जाता है लेकिन यहां पर जेई साहब जज की भूमिका में नजर आते दिख रहे हैं इनके सामने नियम कानून शायद कोई माने ही न रखते हो पीड़ित संविदा कर्मी द्वारा बताए अनुसार उससे जेई ने रिश्वत की मांग की जिसमें उसने असमर्थता जताई तो उसे निकाल दिया गया सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार जेई के उत्पीड़न से आहत व परिवार एवं बच्चों को भूख से तड़पते देखकर पीड़ित कई दिनों से लापता है परिवार के सदस्यों का हाल रो-रोकर बेहाल हो गया है।
स्वतंत्र प्रभात मीडिया परिवार को आपके सहयोग की आवश्यकता है ।
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