शिनजियांग में मानवाधिकार के उल्लंघन को लेकर सख्त कार्रवाई की मांग, UN पर बनाया दबाव

 
शिनजियांग में मानवाधिकार के उल्लंघन को लेकर सख्त कार्रवाई की मांग, UN पर बनाया दबाव

स्वतंत्र प्रभात 

विभिन्न देशों के राजनयिकों एवं मानवाधिकार समर्थकों ने चीन को लेकर ‘‘मानवता के खिलाफ अपराधों’’ संबंधी रिपोर्ट के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र से उसके खिलाफ कड़े कदम उठाने की अपील करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्था को भविष्य में इस बात को लेकर आंका जाएगा कि वह जातीय अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को लेकर चीन पर लगे आरोपों के मामले से किस प्रकार निपटती है। 

मानवाधिकार समर्थक संस्थाएं एवं पत्रकार कई वर्षों से शिनजियांग में उइगर और अन्य मुस्लिम जातीय समूहों के उत्पीड़न का आरोप लगाते रहे हैं। चीन पर शिनजियांग में इन समूहों पर अत्याचार करने, उनका यौन उत्पीड़न करने और उन्हें वहां से जाने के लिए मजबूर करने का आरोप है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की गत माह जारी एक रिपोर्ट ने इन आरोपों को और हवा दे दी है।

अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत फर्नांड डी वेरेंस ने ‘अटलांटिक काउंसिल एंड ह्यूमन राइट्स वॉच’ द्वारा प्रायोजित एक कार्यक्रम में कहा, अब निष्क्रिय बने रहना संभव नहीं है। यदि हम सजा दिए बगैर किसी को छोड़ देंगे, तो इससे क्या संदेश जाएगा? इसलिए इस पर कार्रवाई होना चाहिए।

ड्रैगन पर लगाम लगाना है जरूरी
न्यूयार्क में सोमवार को अटलांटिक काउंसिल एंड ह्यूमन राइटवाच द्वारा आयोजित फोरम पर चर्चा के दौरान संयुक्त राष्ट्र में अल्पसंख्यक अधिकारों के संपर्ककर्ता फर्नांड वरेनेस ने कहा कि चीन में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर निष्क्रियता अब ज्यादा संभव नहीं है। अगर हमने इस मामले को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया तो क्या संदेश जाएगा। इसी तरह संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के उप राजदूत जेफरी प्रेसकोट ने कहा कि अगर इस मामले पर कुछ निर्णय न हुआ, तो इस अंतरराष्ट्रीय संस्था की गरिमा पर ठेस पहुंचेगा।

महिलाओं से यौन उत्पीड़न
चीन के शिनजियांग प्रांत में वर्षों से अल्पसंख्यक उइगर मुस्लिमों व अन्य समुदायों को प्रताडि़त करने व उनके विरुद्ध अत्याचार की घटनाएं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व मीडिया द्वारा उठाई जाती रही है। उइगरों को अवैध रूप से शिविरों में रखकर उनसे बंधुआ मजदूरी कराने, महिलाओं से यौन दु‌र्व्यहार आदि की रिपोर्ट लगातार आती रही हैं। बता दें कि बीते 31 अगस्त को अपने कार्यकाल के अंतिम दिन संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार मामलों की प्रमुख मिशेल बचलेट द्वारा जारी रिपोर्ट में चीन पर लगते आ रहे आरोपों को सही ठहराने के बाद मामला और गरमा गया। हालांकि, चीन ने इस रिपोर्ट को मनगढंत बताते हुए इस पर सवाल उठाए थे।
 

   

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