कोटेदार के सामने ग्रामीण व प्रधान हुए नतमस्तक- राशन चोरी के खिलाड़ी

 
कोटेदार के सामने ग्रामीण व प्रधान हुए नतमस्तक- राशन चोरी के खिलाड़ी

स्वतंत्र प्रभात-

बीघापुर उन्नाव। जहां योगी सरकार की फ्री स्कीम से गरीबों को मिलता अनाज लेकिन इसके बाद भी दबंग कोटेदार की दबंगई से ग्रामीण परेशान बीघापुर ग्राम सभा रुझेई के कोटेदार सतयुग कुमार गांव के लोगों के अंगूठे लगवा कर नहीं दे रहे राशन। जबकि ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो उन लोगों से गाली गलौज हो गई कहते हैं कि राशन नहीं देंगे। जो करना हो मेरा कर लीजिए मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता ग्रामीणों का कहना है कि कोटेदार जब भी राशन बांटते हैं तो शराब पीकर बैठते हैं राशन लेने वाली महिलाओं से अभद्रता से बातचीत करते हैं कोटेदार राशन हमेशा देर से ही लाते हैं और सभी ग्रामीणों के अंगूठे एक साथ लगवा लेते हैं उसके बाद शुरू होता है कोटेदार का काला कारनामा जो बगल के ग्रामीण हैं यदि वह सुबह राशन लेने आते हैं तो उनसे कहा जाता है आप लोग शाम को आ जाए यदि ग्रामीण 2:00 या 3:00 बजे आ जाते हैं तो उनको यह कहकर भगा दिया जाता है कि दोपहर में आराम भी नहीं करने दोगे क्या मेरे पास केवल आप लोगों की गुलामी का ही काम है मेरे पास और भी बहुत सारे काम है इसलिए दोपहर में मत आना और उनको वापस लौटा दिया जाता है इसके बाद यदि वह लोग 5:00 बजे के बाद आते हैं तो उनसे यह कह कर लौटा दिया जाता है कि अब शाम हो गई है हमें काम से जाना है आप लोग थोड़ा लेट हो गए हैं इसलिए अब कल सुबह आना कोटेदार ने बिना राशन दिए कई बार और कई दिन वापस कर दिया यही खेल चलता रहा अब सोचने वाली बात यह है की जो ग्रामीणों को राशन मिलता है उसकी कीमत लगभग 300 से 400 की होती है और जो ग्रामीण मजदूरी करते हैं उनकी मजदूरी 300 से ₹400 तक होती है आप सोचिए अगर राशन के लिए मजदूर तीन-चार दिन चक्कर काटता है तो तीन-चार दिन की मजदूरी हजार से 12 सो रुपए बनती है 400 की राशन के लिए उसका हजार से बारह सौ मजदूरी का नुकसान होता है तो अंत में ग्रामीण मजबूर और परेशान होकर कहता है अब हम राशन लेने ही नहीं आएंगे इस तरह कोटेदार अपनी गलत मंशा में कामयाब हो जाता है अब ऐसे चोर कोटेदार पर क्या कार्रवाई सुनिश्चित हो पाती है गंभीर सवाल है पूर्व में भी शिकायत हो चुकी है लगभग 40 साल से कोटेदार है। जबकि वर्तमान प्रधान ऊदल लगातार कोटेदार को हिदायत दे रहे हैं।

   

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