गाद हटाने के नाम पर दियारा इलाके में बालू की मची है लूट

खड्डा तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का हैं मामला
 
अवैध खनन
खनन माफिया और पुलिस विभाग का अवैध कमाई का बना जरिया 
शिव शम्भू सिंह

खड्डा, कुशीनगर। 

खड्डा क्षेत्र में में सिल्ट सफ़ाई के नाम पर जो कुछ हो रहा है वह कल के बुरे दिन होगे। जिस प्रकार नारायणी नदी में अवैध खनन धड़ल्ले चल रहा है और खनन अधिकारी आंखे बंद कर जांच करने की जैसे हवाला दे रहे हैं रहे है। जिनके अंदर का खेल यही साबित कर रहा हैं कि सिर्फ नौकरी पाए हैं पैसा कमाना टारगेट हैं जो पैसा अपने बीबी बच्चो को खुश करने में मदद करेगा। इसमे सेटिंग बाज मलाई काट रहे है क्योंकि सेटिंग पूरी तगड़ी है मामला खड्डा तहसील के लक्ष्मीपुर का है।

खनन के जानकार बताते हैं कि एक किसान अपनी एकएकड़ जमीन की गाद हटाने का जिम्मा उठाता है उसकी जिम्मेदारी खनन माफिया उठाते हैं। एक एकड़ जमीन की गाद हटाने में ऊपर से नीचे तक 30 से 40 लाख रुपए लग जाता है और मोटे तौर पर खनन में लिप्त माफिया कहते हैं घाट का टेंडर हुआ है। ऐसा नहीं है कि अधिकारी नही जानते हैं।

अब रही बात जो रायल्ट सरकारी खजाने में जानें के लिए कटती है उसमे भी सरकार के साथ बड़ा धोखा हैं। उस रायल्टी की बार कोड की जांच न पुलिस कर्मी करते हैं न विभाग। ठिकेदार कहते हैं सब कुछ ईमानदारी से किया जाए तो धंधा नही चलेगा। यहां तो सब भगवान भरोसे पर हो रहा है।

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