अपहृत युवती की पांचवे दिन बरामदगी न होने पर संदेह के कटघरे में पुलिस..!

पीड़ित परिजनों के पीछे पड़ी पुलिस ने अपहृत युवती की ऑडियो माता पिता को कैसे सुनाए, अब तो पुलिस की कुंडली खंगालने की जरूरत 
 
अपहरण
जाति विशेष समुदाय द्वारा अवयस्क युवती की अपहरण मामले को पुलिस दे रही हैं तूल

स्वतंत्र प्रभात 
कुशीनगर, उत्तर प्रदेश। जिले के थाना जटहां बाजार क्षेत्र में नाबालिग युवती की बाइक सवार तीन बदमाशों द्वारा दिनदहाड़े अपहरण की घटना इलाके में सनसनी मचा दिए।  घटना में पांचवे दिन भी हाथ पर हाथ धरी निष्क्रिय पुलिस बरामदगी करने में विफल रही। जिससे युवती के साथ किसी अनहोनी की आशंका से परिवार में दहशत का माहौल हैं।

उल्लेखनीय है कि जटहां बाजार थाना क्षेत्र के पड़री पिपरपारी में बीते 25अगस्त को 10 बजे दिन में हुई अवयस्क युवती की अपहरण कांड मामले में पुलिस ने आईपीसी अपहरण के धारा की जगह गंभीर घटना का अल्पीकरण करते हुए कही न कही अपराधी को संरक्षण देते हुए मनचाही तहरीर लेकर 363, 366 की कार्यवाही कर मामले को इतिश्री कर दिया। इससेे यह स्पष्ट संदेह खड़ा हो रहा है कि कही पुलिसिया मिलीभगत तो नही..? इस मामले में कही न कही सत्ता विरोधी खाकी वर्दी की संलिप्तता उजागर हो रही हैं। सूत्र की बात जाने तो मामला मोटे रकम में अपराधी को बचाने के लिए हर हाल में पुलिसिया गठजोड़ होने से इंकार नहीं किया जा सकता हैं।अब सक्षम अधिकारी इसकी जांच करे तो निश्चित ही सगे संबंधी बिचौलिए धरायेगे और पूरी पटकथा खुलकर सामने आ जाएगी। इससे सरकार की क्षवि धूमिल नही होगी और खाकी पर अपमान का धब्बा भी नही आएगा। अनपढ़ मजदूर मजदूर पीड़ित परिवार की माने तो वो कौन पुलिसकर्मी हैं जो पीड़ित परिवार से आधार कार्ड राशन कार्ड फोटो मांग रहा था, जब कि युवती का फोटो प्राप्त कर लिया हैं। आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है कही कोर्ट मैरिज कराने की साजिश में तो नही है पुलिस..?। यहां तक कह रहा हैं कि तुम्हारी बेटी का फोन आ रहा हैं वह मोबाइल दिखाओ.. सवाल वह पुलिसकर्मी कैसे जान रहा हैं कि अपहृत युवती फोन कर रही है और पीड़ित परिवार को बेटी से बात करने के नाम पर धमका रहा हैं? जिसके डर से पीड़ित परिवार दहशत में हैं।

अब हाई प्रोफाइल बनते मामले की निष्पक्षता से जांच हो तो अपहरण की गुत्थी से तो पर्दा तो हटेगा ही युवती आसानी से बरामद भी हो जायेगी। पीड़ित परिवार की माने तो पुलिस खाने की अलग और दिखाने की अलग दांत दिखा रही हैं और हां पुलिस अपहरण की साक्ष्य साबुत मिटाने के लिए घटना स्थल पर जाने की अभी तक जहमत नही उठाई हैं। बहरहाल बरदात स्थल पर छूटी युवती की चप्पल कानून व्यवस्था को बेशर्मी का चेहरा दिखा रही है। पीड़ित की सुने तो वो कौन पुलिस कर्मी हैं जो पीड़ित परिवार से कहा कि चप्पल उठा लाओ और प्लास्टिक झिल्ली में डालकर घर में रख दो ? युवती की पीड़ित मां ने बताई 28 अगस्त की शाम को मेरी बेटी की आडियो लेकर एक साहब आए और बेटी की ऑडियो सुनाए तो दहाड़ मार कर रोने लगी तो साहब खिसक लिए। ये सब अपहरण प्रकरण की जांच का विषय बन गया हैं।अब देखना हैं पुलिस युवती की सकुशल वापसी कब कराती हैं।अब तो लगता हैं सीएम योगी की सरकार में गरीब बेटियों के परिवार की इज्जत लूटी जायेगी गरीबों के मान सम्मान से सरकार मूंह मोड़ ली हैं और जनप्रतिनिधि अपना विकास का काम देख रहे हैं। सीएम योगी जी संभालिए अपने पुलिस कर्मियों को..!

   

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