मजदूर परिवार दर दर कई सालो से भटक रहे इन मजदूर परिवार की कोई सुनने वाला नहीं

 
मजदूर परिवार दर दर कई सालो से भटक रहे इन मजदूर परिवार की कोई सुनने वाला नहीं

स्वतंत्र प्रभात

उन्नाव बीघापुर ब्लॉक ग्राम पंचायत परौरी चंडिकाबक्स मजरा रूपपुर में मजदूर परिवार दर दर कई सालो से भटक रहे इन मजदूर परिवार की कोई सुनने वाला नहीं ना प्रधान प्रतिनिधि प्रकाश सिंह सुन रहे और ना ही बीघापुर ब्लॉक के आला अधिकारी सुन रहे प्राथी अंजली सिंह पत्नी अशोक सिंह जो बीघापुर ब्लॉक रूपपुर के निवासी हैं आप को बता दें की प्राथी अंजली सिंह आज कई सालो से प्रधान प्रतिनिधि प्रकाश सिंह के यहां के चक्कर लगा रहे हैं बीघापुर ब्लॉक के चक्कर लगा रहे हैं मगर इनकी कोई अधिकारी सुन ही नहीं रहे हैं प्राथी अंजली सिंह ने बताया की हमने तीन बार प्राथना पत्र दिया मगर कोई सुनवाई नहीं हुई ना ही कोई हमारे यहां आधिकारिक रूप से जांच हुई इन दिनों बरसात हो रही है जब बरसात होती हैं तो हम लोग पूरी पूरी रात तिरपाल के सहारे गुजारते हैं हमारी समस्या ना प्रधान प्रतिनिधि प्रकाश सिंह दिख रही है और ना ही कोई साशन के अधिकारियों को दिख रही है कल बरसात होने लगी हम लोग तिरपाल के सहारे मिटटी के छत के नीचे बैठे थे बरसात जोर से होने लगी मिटटी की

छत हमारे लोगों के ऊपर गिरने लगी हम दोनों लोगों ने अपने बच्चो को लेकर भागे हम दोनों लोगों ने जैसे  तैसे अपने परिवार की जान बचाई  मगर हम मजदूरों को सरकार प्रधान प्रतिनिधि प्रकाश सिंह वा आला अधिकारियों को आवास  हमारे लिए नहीं है इसी गांव में जिनके पास घर पक्के मकान बने है उनके लिए प्रधान प्रतिनिधि प्रकाश सिंह आवास भी दे रहे मगर हम मजदूरों के लिए कोई आवास नहीं हम लोगो के पास एक भी बिस्सा जमीन नहीं है हम लोग जो भी मजदूरी करके लाते है वह पेट पालने में लग जाता है हम मजदूर लोग कहा से अपने परिवार के लिए छत

बनवाए कहा से अपने परिवार को संभालने के लिए। पैसा कहा से  लाए जिससे परिवार के लिए छत बना पाए जहां सरकार सबका साथ सबका विकास की कह रही वहीं बीघापुर ब्लॉक के प्रधान प्रतिनिधि प्रकाश सिंह जो की बीघापुर ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि भी है। इसी पंचायत से तीसरी बार  प्रधान प्रतिनिधि बने मगर बीघापुर ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधी जी को अपनी पंचायत के गरीब मजदूरों को छत सरकार से नहीं दिला पा रहे गरीब मजदूर जान जोखिम में डालकर काट रहे जिन्दगी अब सवाल यह उठता है। कि इन गरीब मजदूरों को कौन देगा छत।

   

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