ग्रामीण रोजगार योजना में करोड़ों का घोटाला, 10 साल जांच, चार इंजीनियरों समेत छह पर रिपोर्ट 

  ग्रामीण रोजगार योजना में करोड़ों का घोटाला, 10 साल जांच, चार इंजीनियरों समेत छह पर रिपोर्ट 

हमीरपुर :

जिले के विभिन्न ब्लॉकों में संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (एसजीआरवाई) के तहत हुए विकास कार्यों में करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला समाने आया है। यह घोटाला जिला पंचायत विभाग में हुआ है। इसमें किसी नेता या ठेकेदार का नाम सामने नहीं आया है, बल्कि तत्कालीन अभियंता, अवर अभियंता, अपर मुख्य अभियंता, अपर मुख्य अधिकारी और कैशियर ने घालमेल किया था

दस साल तक चली विजिलेंस की जांच में इन अफसरों की कारगुजारी का खुलासा हुआ। इस पर विजिलेंस विभाग के इंस्पेक्टर संजय कुमार दीक्षित ने आरोपियों के खिलाफ कोतवाली थाने में गबन, धोखाधड़ी, साजिश रचने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। शहर के ग्रामीण इलाकों के विकास और ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने के लिए 2003-04 में संपूर्ण ग्रामीण विकास योजना शुरू की गई थी।

जांच में सामने आया कि तीस फीसदी काम ही ग्रामीण मजदूरों से कराया गया इस योजना के तहत जिला पंचायत विभाग को विकास कार्य कराना था। उस वक्त जिला पंचायत विभाग में राज कमल सक्सेना और विनोद कुमार माखीजा अभियंता थे। योगेंद्र कुमार द्विवेदी, चिरंतन त्रिपाठी अवर अभियंता, नरेश कुमार अपर मुख्य अधिकारी और रमाशंकर त्रिपाठी कैशियर थे। इन अफसरों ने नित्येश्वर आश्रम में तालाब की खुदाई के साथ ही ग्रामीण इलाकों में सड़क, पुलिया का निर्माण कराया था।

इंस्पेक्टर संजय कुमार दीक्षित की जांच में सामने आया कि तीस फीसदी काम ही ग्रामीण मजदूरों से कराया गया। 70 फीसदी काम जेसीबी समेत अन्य मशीनों से कराया गया। इसके बाद फर्जी मास्टर रोल तैयार किया गया, जिसमें मजदूरों के फर्जी नाम-पते डाले। फिर कैशियर से बिल पास कराकर करोड़ों रुपये हड़प लिए। 

 

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