जनार्दन की लाठी में आवाज नही
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(नीरज शर्मा)
आज हमें आजाद हुए 75 सालों से ज्यादा का वक्त हो गया है।इन 75 सालों में हमारे देश ने पूरे विश्व में लोकतंत्र की ऐसी मिसाल कायम की है जिससे पूरी दुनिया के सामने हमारा देश लोकतांत्रिक तरीके से आम लोगों की आम लोगों द्वारा चुनी कामयाब होती सरकारो का बडा उदाहरण बन गया है।हर देश भारत में सरकार चुनने के तरीके की तारीफ करे बिना नही रह पता।जो की सभी भारतीय के लिए गर्व का विषय है।
अब यहां विचार करने योग बात यह है कि वास्तव में जिन जन प्रतिनिधियों को हम आम समझ कर चुनते है वो चुने जाने के बाद अगले पांच साल तक आम ही क्यों नही बने रह पाते।वो आम से एकाएक खास और फिर खास से बहुत खास कैसे हो जाते है।पहले जो लोग आम जनता की बातें सुनकर काम करवाने के नारे लगा रहे होते है वो कैसे कुर्सी पर बैठ कर बहरे हो जाते हैं या फिर बहरे होते नहीं पर आम जनता को नजरअंदाज करते हुए अपने व्यक्तिगत फायदे को आगे रख के काम करने लगते हैं। निस्संदेह जब कोई आप की आवाज नही सुनता तो आप को पूरी ताकत से चिल्लाना पडता है।इसी तरह निराश हो जनता को अपनी ताकत सरकार को दिखानी पडती है।अपनी आवाज की ताकत और विरोध सरकार को दिखाने के लिए जनता को जन आंदोलन का सहारा लेना पड़ता है।भारत में आजादी से पहले से ही अंग्रेजी हकूमत के खिलाफ अहिंसक जन आंदोलन होते रहे हैं।आजाद भारत में भी सरकार जब जब निरंकुश हुई है। जनता ने ताकतवर से ताकतवर सरकार के घमंड में उडते राजनेताओ को अपनी एकता और एकजुटता से उनकी गलती का एहसास करवा उनकी अक्ल ठिकाने लगाई है।
सरकार के तानाशाही रवैए,भ्रष्टाचार,बेरोजगारी आदि के खिलाफ बहुत से अंदोलन आजाद भारत में हुए जिनमें सब से प्रमुख रहे इन्दिरा सरकार के खिलाफ जेपी आंदोलन, मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ हुआ अन्ना आंदोलन,वर्तमान मोदी सरकार के खिलाफ हुआ किसान आंदोलन। ऐसे ही आंदोलन अंग्रेजों के समय भी सरकार की नीतीयों और फैसलों के खिलाफ होते थे जिन्हे अंग्रेजी सरकार दबाने के लिए पूर्ण बल से उन आंदोलनकारियों को मारती पीटती और जेलों में ठूस देती थी। इन आजादी के आंदोलनों में बहुत से विचारधाराए लोगो कों अपने साथ जोड़ती थी। जिसमें नरम दल के विचारों और गर्म दल के विचारों का प्रभाव लोगों पर सबसे अधिक पडा। गर्म दल की विचारधारा ने लोगों में तब विस्तार पाया जब आम लोगों को यह लगने लगा कि अंदोलन से हमारी बात सरकार के कानों में नही जा रही है तब आम जनता को अपनी आवाज सरकार के खिलाफ बुलन्द करने के लिए दूसरे तरीक़ों का इस्तेमाल करना पडता था।इतना आक्रोश जनता में तब पैदा होता है जब सरकार उनके हक को दबाने की कोशिश करती रहे और आम लोगों से बातचीत का रास्ता त्याग चुकी हो।ऐसी स्थिति में फिर धमाकों की आवाज ही सरकार के कानों के बंद पर्दे खोल पाते हैं।ऐसे ही एक धमाके की आवाज ने गोरों की बहरी सरकार के कानों के पर्दे खोले थे।वो धमाका किया था शहीदे आजम भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने जिनका कहना था कि बहरों को आवाज सुनाने के लिए धमाके करने पड़ते हैं।
उन धमाको में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने किसी ऐसी चीज का इस्तेमाल नही किया था जिस से किसी को भी कोई नुकसान हो परन्तु फिरंगी सरकार ने उन्हे आतंकवादी घोषित कर जेलों में ठूंस दिया था।आजाद भारत में भी ऐसी ही एक घटना 13 दिसम्बर 2023 में घटित हुई।निस्संदेह इस तरह के कार्यो का हम समर्थन नहीं करते परन्तु देश में कुछ सालों से जैसा माहौल बना हुआ है जिसमें सरकार धरना करने वालों की मांगो की तरफ ध्यान ही नही देती तो फिर जनता के सामने क्या विकल्प रह जाता है।जहां लाखों किसानो को इंसाफ पाने के लिए एक साल से ज्यादा समय तक दिल्ली का मार्ग रोक के सड़कों पर बैठना पडता हो या ओलंपिक पदक विजेता महिलाओ द्वारा उनकी फेडरेशन के अध्यक्ष पर यौन शोषण के आरोप लगा इंसाफ पाने के लिए धरना प्रदर्शन करते हुए पुलिस की लाठियां खा बिना किसी नतीजे के अपना धरना उठाना पडता हो तो फिर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए बेरोजगारी का मुद्दा उठाते नौजवानों द्वारा संसद को धुंआ धुंआ करने जैसी घटना होनी ही थी।अब चाहे तो सरकार उनका नाम किसी पार्टी, किसी संगठन या किसी देश विरोधी ताकतों के साथ जोड सकती है परन्तु यह तो सब को मानना पड़ेगा की यदि वे किसी देश विरोधी ताकतों के हाथों की कठपुतली होते तो वे कुछ ना कुछ नुकसान पहुंचाने वाली कारवाही करते ना की इस तरह के सांकेतिक बम विस्फोट का प्रदर्शन करते।क्या ये लोग गलत थे या सही थे इसका फैंसला तो सब अपने अपने विवेक के अनुसार कर सकते हैं।
परन्तु फैंसला देने से पहले यह अवश्य सोच लेना की सरकार के कानो तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए नौजवान ऐसा काम पहले भी किए है यदि आज ये नौजवान गलत हैं तो उस समय वो क्रन्तिकारी भी गलत थे परन्तु यदि वो क्रन्तिकारी ठीक थे तो यह नौजवान भी ठीक हैं।एक ही तरह से और एक ही मकसद से हुई दो घटनाओ को हम अलग अलग चश्मों से नही देख सकते।आज सरकार यदि समय रहते समझ जाए की लोगो में असंतोष की भावना घर कर रही है तो अच्छा है अन्यथा इस बहरेपन के अंजाम और भी घातक हो सकते हैं।हमारी सरकार को एक बात समझनी होगी उनकी नीतियां इस बात से ही ठीक साबित नही हो जाती कि वो चुनाव जीत रही है।आज सरकार जिस कांग्रेस की जिन नीतीयों को गलत बता कर लोगों से वोट ले रही है।
वो ही कांग्रेस अपनी नीतियों के दम पर इसी देश के लोगो की वोटों से लगभग 60 सालों तक इस देश की सता पर काबिज रही थी और इनका देश की सता से बाहर होने का मुख्य कारण भी आम लोगों से विमुख हो जाना ही था।किसी समय कांग्रेस भी भारत में एक अजय योद्धा की तरह विचरती थी।परन्तु सत्ता पक्ष अपने पिछलग्गू लोगो को ही देश समझ सत्ता के मद में चूर हो भूल जाती है कि जनता जनार्दन है और जनार्दन की लाठी में आवाज नही होती।
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